अररिया- गर्भवती माताओं के जरूरी स्वास्थ्य जांच के लिये हुआ अभियान संचालित।

  • प्रधानमंत्री मातृत्व योजना के तहत चिकित्सा संस्थानों में हुआ विशेष शिविर आयोजित।
  • सुरक्षित मातृत्व व मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी लाना अभियान का उद्देश्य

अररिया, 11 अक्टूबर । प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत मंगलवार को जिले के सभी चिकित्सा संस्थानों में विशेष चिकित्सकीय शिविर का आयोजन किया गया. शिविर में गर्भवती महिलाओं का जरूरी चिकित्सकीय जांच करते हुए नि:शुल्क दवा व जरूरी परामर्श उपलब्ध कराया गया. विशेष अभियान के तहत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर, हेल्थ सब सेंटर सहित अन्य संस्थानों में इसे लेकर विशेष इंतजाम किये गये थे. अभियान से पूर्व क्षेत्र की आशा, एएनएम व आंगनबाड़ी सेविका के माध्यम से पोषक क्षेत्र के गर्भवती महिलाओं को चिह्नित किया गया था. ताकि शत प्रतिशत गर्भवती महिलाओं की जांच सुनिश्चित करायी जा सके.

गर्भवती महिलाओं का प्रसव पूर्व चार जांच जरूरी

सिविल सर्जन डॉ विधानचंद्र सिंह ने बताया कि सुरक्षित मातृत्व व जच्चा बच्चा के सुरक्षित भविष्य के लिये प्रसव पूर्व जांच जरूरी है. गर्भावस्था के दौरान कम से कम चार बार जांच जरूरी है. प्रसव पूर्व जांच मां व बच्चे के स्वास्थ्य का पता लगाने के लिहाज से बेहद जरूरी है. इससे गर्भावस्था के दौरान होने वाली जोखिमों की पहचान आसान होती है. संबंधित अन्य रोगों की पहचान व उपचार आसान होता है. इससे हाई रिस्क प्रेग्नेंसी को चिह्नित कर उचित देखभाल व इलाज में मदद से प्रसव संबंधी जटिलता को नियंत्रित करना आसान होता है.

जच्चा-बच्चा की सुरक्षा के लिये प्रसव पूर्व जांच जरूरी

जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ मोईज ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान मुख्य रूप से खून, रक्तचाप, एचआईवी संबंधी जांच जरूरी है. गर्भ में पल रहे बच्चे की सही स्थिति, एनीमिया, एचआईवी सहित अन्य रोगों से बचाव ही नहीं, प्रसव संबंधी जटिल मामलों को चिह्नित करने के लिहाज से ये महत्वपूर्ण है. इसलिये सभी गर्भवती माताओं को गर्भधारण के तुरंत बाद, प्रथम तिमाही के दौरन प्रथम जांच की सलाह दी जाती है. इसके बाद गर्भवास्था के चौथे या छठे महीने में दूसरा, छठे या आठवें महीने में तीसरा व नौवें महीने में चौथा जांच कराना चाहिये .

हाई रिस्क प्रिगनेंसी के 500 मामले चिह्नित

डीपीएम स्वास्थ्य रेहान अशरफ ने कहा कि जिले में मातृ-शिशु मृत्यु दर के मामलों में कमी लाना विभाग की प्राथमिकताओं में शुमार है. लिहाजा शतप्रतिशत गर्भवती महिलाओं के प्रसव पूर्व जांच सुनिश्चित कराने का विभागीय प्रयास जारी है. उन्होंने कहा कि अभियान के क्रम में 4500 सौ महिलाओं का जरूरी जांच करते हाई रिस्क प्रिगनेंसी के 500 मामले चिह्नित किये गये हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published.