अररिया- छह माह तक के बच्चों के संपूर्ण पोषण के लिये मां का दूध ही पर्याप्त।

  • बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए छह माह के बाद ऊपरी आहार का सेवन कराना जरूरी।
  • अन्नप्रशासन दिवस पर बच्चों के सही खानपान व उचित पोषण संबंधी दी गयी जानकारी

अररिया, 19 नवंबर । जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर शनिवार को अन्नप्राशन दिवस मनाया गया। इस क्रम मेंआंगनबाड़ी पोषक क्षेत्र के तहत छह माह की आयु पूरे कर चुके बच्चों को ऊपरी आहार का सेवन कराया गया। आंगनबाड़ी केंद्रों पर इसे लेकर विशेष आयोजन करते हुए छह माह पूरे कर चुके बच्चों की मां व अन्य महिलाओं को अन्नप्राशन के महत्व की जानकारी दी गयी। पोषक क्षेत्र की महिलाओं को ये बताया गया कि छह माह तक के बच्चे को केवल मां का दूध ही देना चाहिये। उसके बाद बच्चों के संपूर्ण पोषण के लिये मां का दूध पर्याप्त नहीं होता। इसलिये मां के दूध के साथ-साथ बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिये ऊपरी आहार देना अनिवार्य हो जाता है।

छह माह बाद बच्चों को ऊपरी आहार देना जरूरी

आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 14 की सेविका आरती देवी ने बताया कि छह माह की उम्र के बाद बच्चोंको अधिक पोषक तत्वों की जरूरत होती है। इसकी पूर्ति नहीं होने पर बच्चा के कमजोर होने व रोगग्रस्त होने का खतरा रहता है। इसलिये पोषक क्षेत्र की महिलाओं को छह माह से अधिक उम्र के अपने बच्चे को मसली हुई दाल, चावल, केला, आलू, सूजी की खीर का सेवन कराने की सलाह दी गयी। थोड़े-थोड़े समय अंतराल पर बच्चों को इसका सेवन कराने के प्रति उन्हें जागरूक किया गया।

समय पर ऊपरी आहार देने से सुपोषित होते हैं बच्चे

जिला पोषण समन्वयक कुणाल श्रीवास्तव ने बताया कि समय पर बच्चों को ऊपरी आहार का सेवन शुरू नहीं कराना बच्चों में होने वाले कुपोषण की बड़ी वजह है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर आयोजित होने वाले अन्नप्राशन दिवस का मुख्य उद्देश्य आम महिलाओं को इसके प्रति जागरूक करना है। उन्होंने बताया कि बच्चों को समय पर ऊपरी आहार देने से बच्चों का सर्वांगीण शारीरिक व मानसिक विकास सही होता है। वहीं बच्चों में रोग प्रतिरोधात्मक क्षमता विकसित होती है।

अन्नप्रशासन हमारे संस्कृति की महत्वपूर्ण कड़ी

डीपीओ आईसीडीएस रंजना सिंह ने बताया कि अन्नप्राशन हमारी संस्कृति का महत्वपूर्ण अंग है। यह संस्कार बच्चों के छह माह पूरा होने के बाद हर घर में किया जाता है। आंगनबाड़ी केंद्र के माध्यम से इसे सामुदायिक गतिविधि के रूप में मनाया जा रहा है। ताकि लोगों को इसके महत्व के प्रति प्रेरित व जागरूक किया जा सके।

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