अररिया- जिले को एनीमिया मुक्त बनाने के लिए संचालित होगा विशेष अभियान।

  • एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन को लेकर होगी जरूरी पहल।
  • हर वर्ष एनीमिया के मामलों में 03 प्रतिशत तक की कमी लाने का लक्ष्य निर्धारित

अररिया, 22 अगस्त | जिले को एनीमिया मुक्त बनाने का प्रयास तेज होने वाला है। स्वास्थ्य विभाग केंद्र सरकार द्वारा संचालित एनीमिया मुक्त भारत निर्माण योजना को प्रभावी बनाने के प्रयासों में जुट गया है। अभी हाल में ही राजधानी पटना में एनीमिया मुक्त भारत अभियान को लेकर हुई उच्चस्तरीय बैठक में इसे लेकर कारगर रणनीति पर विचार किया गया तथा संबंधित अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए गए। बैठक में भाग लेकर लौटे जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ मोइज ने बताया कि एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम को और बेहतर रणनीति के तहत आगे बढ़ाया जायेगा। ताकि इसे निर्णायक मुकाम दिया जा सके।

होगा विशेष अभियान संचालित

जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ मोइज ने बताया कि सामूहिक साझेदारी के साथ अभियान को मजबूती देने का प्रयास होगा। इसमें आईसीडीएस व शिक्षा विभाग का समुचित सहयोग अपेक्षित है। परस्पर सहयोग व समन्वय से आयरन युक्त भोज्य पदार्थों के फायदे, खाना बनाने के लिए लोहे की कढ़ाई का उपयोग व बच्चों के बीच स्कूलों में आईएफए संबंधित जागरूकता अभियान संचालित किये जायेंगे।

विद्यालय व आंगनबाड़ी केंद्रों पर दी जाती है नि:शुल्क दवा

जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ मोइज ने बताया कि आशा कार्यकर्ताओं द्वारा गृह भ्रमण के दौरान 06 से 59 माह के बच्चों को सप्ताह में दो बार आयरन फोलिक एसिड (आईएफए) सिरप एक एमएल दिया जा रहा है। जबकि 5-9 साल के बच्चों को सप्ताह में गुलाबी आयरन फोलिक एसिड की एक गोली प्राथमिक विद्यालय में प्रत्येक बुधवार को मध्याह्न भोजन के बाद शिक्षकों के माध्यम से दिया जा रहा है। विद्यालय नहीं जाने वाले लडके-लडकियों को आशा के माध्यम से दवा की खुराक दी जाती है। 10 से 19 साल के किशोर और किशोरियों को हर हफ्ते आईएफए की एक नीली गोली दी जाती है। जिसे विद्यालय एवं आंगनबाड़ी केन्द्रों पर प्रत्येक बुधवार को भोजन के बाद शिक्षकों एवं आंगनबाड़ी सेविका के माध्यम से निःशुल्क प्रदान की जाती है।

मानसिक व शारीरिक क्षमता को प्रभावित करता है एनीमिया

सिविल सर्जन डॉ विधानचंद्र सिंह ने बताया की एनीमिया एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। ये लोगों के शारीरिक व मानसिक समस्या को प्रभावित करता है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-05 के अनुसार, बिहार में 6 से 59 माह के 69.5 प्रतिशत बच्चे, प्रजनन आयु वर्ग की 63.6 प्रतिशत महिला एंव 58.3 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं एनीमिया से ग्रसित हैं। सिविल सर्जन ने बताया कि इस अभियान के तहत 6 विभिन्न आयु वर्ग की महिलाएं व बच्चों को लक्षित किया गया है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य एनीमिया जैसे गंभीर रोगों से उनका बचाव करना है। इस कार्यक्रम के तहत एनीमिया में प्रतिवर्ष 3% की कमी लाने का लक्ष्य रखा गया है।

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