अररिया- तनावमुक्त व खुशहाल जीवन के लिये चाहत व जरूरत के बीच सामांजस्य जरूरी।

  • जीवन के प्रति साकारात्मक नजरिया अपना कर तनाव व उदासी को मात देना संभव।
  • मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता जरूरी, खुश रहें व दूसरों को खुश रखने का करें प्रयास

अररिया, 10 अक्टूबर । मानसिक स्वास्थ्य जीवन के महत्वपूर्ण पहलूओं में से एक है। ये न सिर्फ किसी व्यक्ति की मनोदशा व व्यवहार को प्रभावित करता है। बल्कि उसके सोचने, जीवन को देखने व चुनौतियों से लड़ने की क्षमताओं को परिभाषित करता है। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के मौके पर सोमवार को जिला प्रशासन के तत्वावधान में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दे को लेकर विस्तृत परिचर्चा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। उप विकास आयुक्त मनोज कुमार की अध्यक्षता में आयोजित इस परिचर्चा में बड़ी संख्या में वरीय प्रशासनिक व स्वास्थ्य अधिकारियों ने भाग लिया। उन्होंने अपना विचार व अनुभव साझा करते हुए मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े चुनौती व इसके समाधान पर अपने विचार रखे।

प्राथमिकताओं का निर्धारण व उचित प्रबंधन जरूरी

डीडीसी मनोज कुमार ने कहा कि अपने काम व जिम्मेदारियों के बीच बेहतर सामंजस्य, व्यवस्थित दिनचर्या व अपने आस-पास के माहौल को खुशनूमा बना कर हर तरह के तनाव व उदासी को मात दिया जा सकता है। ऑफिस के काम व पारिवारिक जीवन के बीच बेहतर तालमेल होना जरूरी है। प्राथमिकताओं का निर्धारण व इसका उचित प्रबंधन हमें मानसिक रूप से खुशहाल बनाता है। अपना विचार रखते हुए सदर एसडीओ शैलेशंचद्र दिवाकर ने कहा कि हर व्यक्ति की अपनी अलग समस्या है।, ऐसी कोई समस्या नहीं जिसका समाधान न हो। और अपनी समस्याओं को आपसे बेहतर समाधान कोई और नहीं कर सकता है। इस लिये हर हाल में साकारात्मक बने रहने की जरूरत है। एसडीपीओ पुष्कर कुमार ने कहा कि शारीरिक गतिविधियां, पसंदीदा खेला में अपनी भागीदारी व्यक्तिगत जीवन के तनाव को कम करने का सबसे आसान जरिया है। सारी चीजों को नियंत्रित नहीं किया जा सकता है। इसलिये कुछ एक चीजों को ब्रह्मांडीय शक्ति पर छोड़ देना भी तनाव दूर करने में कारगर है।

भौतिक संपदा व पैसों से नहीं हासिल की जा सकती है आनंद व खुशी

डीईओ राजकुमार ने कहा कि खुशी व आनंद ही सभी के जीवन का परम लक्ष्य है। बहुत सारा पैसा, भौतिक संपदा से आपका जीवन आनंदमय नहीं हो सकता है। अपने शोख व खुशी को तलाशें इसे हासिल करने में अपना वक्त व इनर्जी खपत करें। वरीय उपसमाहर्ता विकास कुमार ने कहा कि जीवन का महत्वपूर्ण पहलू होने के बावजूद मानसिक स्वास्थ्य लोगों की निजी समस्या बन कर रह गया है। इस पर विस्तृत चर्चा करते हुए इसके प्रति लोगों को जागरूक करना जरूरी है। जिला सूचना व जनसंपर्क पदाधिकारी दिलीप कुमार ने कहा कि प्रतिर्स्पद्धाओं से भरे इस दौर में हर व्यक्ति तनाव व अवसाद के दौर से गुजरता है। इसलिये जीवन के प्रति साकारात्मक दृष्टिकोण को अपनाते हुए स्वस्थ दिनचर्या अपनाना जरूरी है। कार्यपालक दंडाधिकारी आभा कुमारी ने संयुक्त परिवार के महत्व से अवगत कराते हुए एकल परिवार व व्यक्तिवादी सोच को तनाव व अवसाद का बड़ा कारण बताया।

मानसिक स्वास्थ्य के प्रति गंभीर होने की है जरूरत

कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य पर विचार रखते हुए डीवीबीडीसीओ डॉ अजय कुमार ने बताया कि विकासशील देशों में बीमारियों का स्वरूप भी बदलता रहता है। पूर्व में डायरिया, हैजा, चेचक, पोलियो, कालाजार स्वास्थ्य जनित मुख्य समस्या थी। इसके स्थान पर अब हृदय रोग, मोटापा, कैंसर जैसे रोग तेजी से फैल रहे हैं। इसमे मानसिक स्वास्थ्य महत्वपूर्ण पहलू बन कर उभरा है। धीरे-धीरे लोग इसके प्रति जागरूक भी हो रहे हैं। डीआईओ डॉ मोईज ने कहा कि हमे अतिवादी होने से बचना होगा। तनाव बीमारियों को आमंत्रित करता है। इसलिये इससे बचाव जरूरी है। कार्यक्रम का संचालन कर रहे डीपीएम स्वास्थ्य रेहान अशरफ ने कहा कि चुनौतियों से भरे इस दौर में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या बेहद आम है। बावजूद इसके महत्व को अब तक नजरअंदाज किया जाता रहा है। इसे गंभीरता से लेने की जरूरत है। दूसरों से जुड़ना, शारीरिक गतिविधियों में शामिल होना, दूसरों की मदद करना, पर्याप्त नींद लेना व साकारात्मक बने रहना मानसिक स्वास्थ्य के लिये जरूरी है। बैठक में कई स्वास्थ्य अधिकारी व सहयोगी संस्था के प्रतिनिधि मौजूद थे।

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