अररिया- दुर्गा मंदिर महथावा: 14 वर्षों से हो रही है पूजा, 2009 में मंदिर का निर्माण, मंदिर की ख्‍याति हर ओर।

अररिया अंकित सिंह। अररिया. जिले के भरगामा प्रखंड के महथावा दुर्गा मंदिर में 14 वर्षों से मां की प्रतिमाएं स्थापित हो रही है। यहां धूमधाम से नवरात्र मे पूजा होती है। महथावा के ही रामविलास भगत,कमल किशोर साह,गणेश दास ने आधारशिला रखा था। व इस मंदिर को ग्रामीणों की सौजन्य से निर्माण कराया गया। मान्यता है कि इस मंदिर में मन्नत मांगने वालों की सभी मुरादें पूरी होती है। इस कारण यहां पूजा में दूर-दराज से भी लोग पहुंचते हैं। मंदिर में काफी भीड़ रहती है। यहां हर वर्ष दो दिनों का बड़ा मेला लगता है। पूजा के दौरान सप्तमी को मंदिर का पट खुलता है और पूजा की विधि प्रारंभ हो जाती है। महानिशा पूजा के साथ सप्तमी तिथि को पूजा का मुख्य अनुष्ठान शुरू हो जाती है. श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया जाता है। पूजा के दौरान सप्तमी,अष्टमी और नवमी तिथि को तीन दिनों तक खिचड़ी का महाभण्डारा आयोजन होता है। प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोग भंडारा का प्रसाद ग्रहण करते हैं। दशमी को पूजन अनुष्ठान की समाप्ति पर महिलाओं द्वारा सिंदूर खेल का आयोजन बड़े ही भव्य तरीके से की जाती है और उसी दिन मेला आयोजन के बाद देर रात्रि को गाजे बाजे के साथ स्थानीय राय टोला स्थित महादेव मंदिर पोखर में प्रतिमा विसर्जन कर दी जाती है। इस दौरान बड़ी संख्या में भक्तगण यहां पूजन कार्यक्रम में शामिल होने आते हैं।

सालों भर होते रहते हैं धार्मिक अनुष्ठान

इस मंदिर में सालों भर कोई न कोई विशेष धार्मिक अनुष्ठान होते रहते हैं. पूजा के समय का नजारा यहां देखते ही बनता है। यहां दुर्गा पूजा शास्त्र के अनुसार होती है और पुरोहित महथावा के हरेराम झा होते हैं। पूजा में यहां भारी भीड़ उमड़ती है। यहां दूर दराज से श्रद्धालु मन्नतें मांगने आते हैं। मन्नतें पूरी होने पर श्रद्धा अनुसार लोग बढ़-चढ़ कर दान करते हैं।

मंदिर की विशेषताएं – 2009 में ग्रामीणों ने मंदिर का निर्माण कराया. मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में सभी समुदाय के लोग पहुंचते हैं। पहली पूजा से लेकर दशमी की संध्या तक भव्य जागरण का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष के 26 सितंबर से 5 अक्टूबर तक होने वाले भव्य जागरण कार्यक्रम में विष्णु,अस्मिता स्वरूप,संतोष बेबी (कटिहार) रुचि ठाकुर,दुर्गा बोस (कोलकाता) आरोही झा,रिषिता राज,नेहा चंचल (भागलपुर) ज्योति माही (बनारस) राधा मोर्या (मुम्बई) मनीषा मुखर्जी (बंगाल) प्रीतम चक्रधारी (दरभंगा) दिनेश दीवाना (स्थानीय) इन सभी कलाकारों का पदार्पण होना तय हुआ है.

हर वर्ष की तरह इस बार भी दुर्गा मंदिर में प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना की जायेगी। भव्य प्रतिमा का निर्माण किया जायेगा। महाआरती में कई गांवों की महिला पहुंचेंगी। सुरक्षा को लेकर समिति के सदस्यों का काम बटा रहेगा.

यहां प्रत्येक दिन संध्या आरती होती है। खासकर दुर्गा पूजा में विशेष महाआरती व श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण किया जाता है। मंदिर का इतिहास काफी पुराना और समृद्ध है।

करीब 14 वर्ष पूर्व यहां झोपड़ीनुमा मिट्टी-एवं घास-फूस से निर्मित दुर्गा मंदिर की स्थापना कर पूजा का शुभारंभ किया था। मां की अपरंपार शक्ति की मुरीद हुए श्रद्धालुओं की आस्था इस मंदिर के प्रति दिन प्रतिदिन बढ़ती गई। देवी की कृपा से समाज भी शांति एवं सदभाव के साथ प्रगति के पथ पर आगे बढ़ता गया। जिसका फलाफल है कि फूस का यह मंदिर आज भव्य स्वरूप ले चुका है। सामाजिक सहयोग से आज जिला के सबसे बड़े मंदिर के रूप में इसे पहचाना जाता है. आपसी सौहार्द और मिल्लत का भाव का प्रतीक है ये मंदिर इसलिए यहां दूर-दराज से लोग पूजा अर्चना करने पहुंचते हैं।

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