अररिया- परिवार विकास अभियान की सफलता के लिए जागरूकता रथ रवाना।

  • योग्य दंपतियों को सीमित परिवार के महत्व के प्रति किया जायेगा जागरूक।
  • पहले बच्चे में देरी व दूसरे बच्चे में पर्याप्त अंतर रखना परिवार की खुशहाली के लिये जरूरी

अररिया, 05 सितंबर । जिले में मिशन परिवार विकास अभियान की सफलता को लेकर सिविल सर्जन की अध्यक्षता में सोमवार को डीआरडीए सभागार में बैठक हुई। इसमें अभियान के विभिन्न चरणों की सफलता की रणनीति तैयार की गयी। ग्रामीण इलाके के लोगों को अभियान के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से डीडीसी मनोज कुमार, सिविल सर्जन सहित अन्य ने जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस मौके पर सभी एमओआईसी, बीएचएम, सदर अस्पताल के अधीक्षक जीतेंद्र प्रसाद, डीएमएनई पंकज कुमार सहित सहयोगी संस्था के प्रतिनिधि मौजूद थे।

दो चरणों में संचालित होगा अभियान

डीडीसी मनोज कुमार ने कहा कि जिले में 05 से 24 सितंबर के बीच परिवार विकास अभियान चल रहा है। 05 से 11 सितंबर तक पहले चरण में दंपत्ति संपर्क पखवाड़ा व 12 से 24 सितंबर के बीच परिवार नियोजन सेवा पखवाड़ा आयोजित किया जायेगा। आम लोगों को इस दौरान छोटे परिवार के महत्व की दी जायेगी तथा योग्य दंपतियों को परिवार नियोजन के स्थायी व अस्थायी साधनों के बारे में बताया जाएगा।

आर्थिक सुरक्षा परिवार के विकास का आधार

सिविल सर्जन डॉ विधानचंद्र सिंह ने कहा कि आर्थिक सुरक्षा किसी भी परिवार के विकास का आधार है। परिवार बड़ा होने से उसकी आर्थिक सुरक्षा प्रभावित होती है। इससे परिवार के सदस्यों का भरण-पोषण, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी जरूरतें प्रभावित होती हैं। इसलिये परिवार के विकास के लिये योजनाबद्ध तरीका अपनाया जाना जरूरी है। अभियान के क्रम में शादी के बाद पहले बच्चे में कम से कम दो साल की देरी, दो बच्चों के बीच पर्याप्त अंतर रखने के लिये प्रेरित किया जाना है। इसके लिये उपलब्ध साधन व सुविधाओं के प्रति योग्य दंपतियों को जागरूक करते हुए उन तक इसका लाभ पहुंचाया जायेगा ।

जरूरी सेवाओं तक होगी आसान पहुंच

डीपीएम स्वास्थ्य ने बताया कि अभियान के क्रम में आम दंपति को पहला बच्चा अभी नहीं, दूसरा बच्चा जल्दी नहीं व तीसरा बच्चा कभी नहीं के मूल मंत्र के प्रति जागरूक किया जाना है। अभियान के क्रम में कुल 540 महिला बंध्याकरण व 25 पुरूष नसबंदी का लक्ष्य निर्धारित है। जिले में 3000 हजार आशा कार्यकर्ता हैं। प्रत्येक आशा कर्मी को कम से कम दो दंपति को नियोजन के स्थायी व अस्थायी साधन के प्रति प्रेरित करने की जिम्मेदारी सौंपी गयी है।

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