अररिया- राज्यस्तरीय अधिकारी ने किया कुष्ठ रोगी खोज अभियान का निरीक्षण।

-जिले में फिलहाल कुष्ठ रोग से ग्रसित हैं 319 मरीज, रोगियों का समुचित इलाज जारी
-कुष्ठ रोग से बचाव के लिये शरीर के किसी भाग में होने वाले दाग-धब्बों को गंभीरता से लेना जरूरी

अररिया, 12 अक्टूबर । जिले में कुष्ठ रोगियों की खोज के लिये विशेष अभियान संचालित है। 08 से 18 अक्टूबर के बीच संचालित इस अभियान के क्रम में जिले के सभी 09 प्रखंडों में आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, स्वैच्छिक महिला व पुरुष कार्यकर्ताओं द्वारा घर-घर जाकर संभावित कुष्ठ रोगियों की खोज की जा रही है। इस क्रम में स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा 02 साल से अधिक उम्र के लोगों का शारीरिक परीक्षण किया जा रहा है। शरीर पर उभर रहे दाग-धब्बों की जांच के उपरांत कुष्ठ के लक्षण दिखने पर नजदीक के चिकित्सा संस्थानों में उनका इलाज सुनिश्चित कराने क प्रयास किया जा रहा है। जिले के सिकटी व कुर्साकांटा प्रखंड में संचालित रोगी खोज अभियान का बुधवार को राज्यस्तरीय अधिकारी ने निरीक्षण किया। निरीक्षण में संबंधित प्रखंड के एमओआईसी, बीएचएम व बीसीएम, डीएमटी सहित अन्य शामिल थे।

शुरुआती दौर में रोग का पता चलना जरूरी –
इस क्रम में राज्य कुष्ठ कार्यक्रम सलाहकार डॉ चंद्रमणी कुमार ने क्षेत्र में रोगी खोज अभियान से संबंधित गतिविधियों का मुआयना किया। इसे लेकर उन्होंने स्वास्थ्य कर्मियों को जरूरी दिशा निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि कुष्ठ एक सामान्य बीमारी है। शरीर पर दाग-धब्बे व सुन्न होना कुष्ठ के लक्षण हो सकते हैं। किसी भी उम्र में लोग इससे प्रभावित हो सकते हैं। शुरुआती दौर में रोग का पता होने से इलाज आसान होता है। सभी सरकारी चिकित्सा संस्थानों में जांच व इलाज का नि:शुल्क इंतजाम उपलब्ध होने की बात उन्होंने कही।

जांच व इलाज का है नि:शुल्क इंतजाम —
जानकारी देते हुए एसीएमओ डॉ राजेश कुमार ने बताया कि सभी प्रखंडों में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी की अगुआई में सघन रूप से कुष्ठ रोगियों की खोज की जा रही है। रोगियों की खोज में संबंधित क्षेत्र की आशा, एएनएम व स्वयंसेवियों की मदद ली जा रही है। उन्होंने कहा कि त्वचा क्षति, मांसपेशियों की कमजोरी, हाथ व पैर का सुन्न होना, शरीर पर कहीं किसी तरह का दाग धब्बा होना कुष्ठ के लक्षण हो सकते हैं। कुष्ठ रोगियों को दो श्रेणियों में विभक्त किया जाता है। एक पूसी बेसिलरी व पीबी व मल्टी बेसिलरी एमबी पीबी में वायरस लोड कम होता है। जबकि एमबी में वायरस लोड ज्यादा होता है। पहले की तुलना में इसे ज्यादा खतरनाक माना जाता है।

जिले में कुष्ठ रोग के 319 मरीज-
जिला कुष्ठ निवारण समिति में डीएमटी पद कार्यरत रमन कुमार ने बताया कि जिले में कुष्ठ के फिलहाल 319 नोटिफाइड मरीज हैं। इसमें 135 मरीज पीबी व 184 मरीज एमबी किस्म के कुष्ठ से प्रभावित हैं। विभागीय स्तर से सभी संक्रमित मरीजों का समुचित इलाज जारी है। पीबी किस्म के कुष्ठ में रोगियों को छह महीने व एमबी किस्म के कुष्ठ में 12 महीने तक दवा सेवन जरूरी है। विभागीय स्तर से इलाजरत मरीजों को जरूरी दवा व सलाह नि:शुल्क उपलब्ध करायी जा रही है।

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