अररिया- सदर अस्पताल में प्रसव संबंधी सेवाओं का केंद्रीय टीम ने लिया जायजा।

  • कर्मियों के क्षमता संवर्द्धन व जटिल मामलों के निष्पादन संबंधी योग्यता का किया आकलन।
  • लेबर रूम व ओटी व्यवस्था का किया आकलन, सेवाओं की बेहतरी को ले दिये जरूरी सुझाव

अररिया, 08 सितंबर। जिले में मातृ-शिशु मृत्यु दर के मामलों में कमी लाने के उद्देश्य से प्रसव संबंधी सेवाओं को बेहतर बनाने का प्रयास जारी है। इस कड़ी में स्वास्थ्य विभाग की सहयोगी संस्था केयर इंडिया की दो सदस्यीय केंद्रीय टीम ने सदर अस्पताल व सिकटी सीएचसी में उपलब्ध प्रसव संबंधी सेवाओं का जायजा लिया । इस क्रम में सदर अस्पताल पहुंची टीम ने लेबर रूम, ओटी वार्ड सहित सुरक्षित प्रसव से संबंधित अन्य विभागों की बारीकी से जांच की। टीम ने प्रतिनियुक्त कर्मियों के क्षमता का भी आकलन किया। सेवाओं की बेहतरी को लेकर संबंधित अधिकारी व कर्मियों को जरूरी सुझाव दिये। दो सदस्यीय टीम में डॉ रश्मि व डॉ जैनुल शामिल थे। इस मौके पर अस्पताल अधीक्षक जीतेंद्र प्रसाद, अस्पताल प्रबंधक विकास आनंद, केयर इंडिया की डीटीएल पल्लवी, डीटीएफओ डोली वर्मा, कंस्लटेंट नौशाद आलम सहित अन्य स्वास्थ्य अधिकारी व कर्मी मौजूद थे।

सेवाओं में हुए सुधार का आकलन उद्देश्य

डॉ रश्मि ने बताया कि केंद्र व राज्य की सरकार सरकारी चिकित्सा संस्थानों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता को लेकर प्रतिबद्ध है। इसे लेकर हर स्तर पर जरूरी प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि अस्पताल में प्रसव संबंधी सेवाओं में किस हद तक सुधार हुआ है, प्रसव वार्ड में कार्यरत एएनएम व जीएनएम के क्षमता संवर्द्धन का प्रयास किस हद तक सफल हो पाया है, इसका आकलन किया गया है। वही डॉ जुनैद ने बताया कि निरीक्षण में मिली कमियों को बेहतर करने से संबंधित जरूरी सुझाव स्वास्थ्य अधिकारी व कर्मियों को दिया गया है। प्रसव सेवाओं में काफी हद तक सुधार हुआ है। इसे और बेहतर बनाने की कोशिशें जारी है।

कर्मियों का कौशल हुआ है विकसित

सदर अस्पताल के अधीक्षक जीतेंद्र प्रसाद ने बताया कि केयर इंडिया की मदद से प्रसव वार्ड में कार्यरत एएनएम व जीएनएम के क्षमता संवर्द्धन को लेकर वर्ष 2016 से अमानत प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। कर्मियों के स्किल डेवलपमेंट के हिसाब से प्रशिक्षण महत्वपूर्ण साबित हुआ है। प्रसव व नवजात के स्वास्थ्य संबंधी जटिल मामलों के निष्पादन संबंधी कर्मियों के कौशल में भी विकास हुआ है।

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