कुर्साकांटा- अंचल कार्यालय को बना दिया दलालों का अड्डा, हर काम के लिए लगता है सुविधा शुल्क।

नज़रिया संवाद कुर्साकांटा। बिहार में नीतीश कुमार की सरकार है। सूबे में सत्ता संभालते ही नीतीश कुमार ने कहा था कि अधिकारी हों या कर्मचारी अगर भ्रष्टाचार में लिप्त पाए गए तो उनको बख्शा नहीं जाएगा। सुशासन की सरकार है लेकिन न तो भ्रष्टाचार खत्म हुआ और न ही भ्रष्टाचार पर कोई लगाम लगी। अधिकारी हों या कर्मचारी आज भी मनमाने ढंग से अनैतिक कार्यों को अंजाम देने में लगे हुए हैं, वहीं अधिकारी और कर्मचारियों के इशारे पर दलालों का ऐसा मकडज़ाल अंचल कार्यालय में बुना गया है, कि आम आदमी अपना कोई भी काम बिना रुपए चढ़ाए नहीं करा पा रहा है।

अंचल हो या हल्का कार्यालय में दलाल और बिचौलियों के इशारे पर हर वह अनैतिक कार्य को बखूबी अंजाम दिया जा रहा है। कायदे-कानून के लिहाज से यह उचित नहीं कहा जा सकता है। लेकिन यहां सब कुछ पैसे की माया है, दलालों-बिचौलियों के जरिए सुगमता से हर काम करा दिया जाता है।

हर बात के लिए तय है सुविधा शुल्क
अंचल कार्यालय में आम जनता की कोई सुनवाई नहीं हैं। तहसील से जुड़े कार्यो के लिए बनाए गए हेल्प डेस्क का भी पालन नहीं हो रहा है। त्रुटि सुधार, खसरा-खतौनी की नकल, बटांकन, बंटवारा, सीमांकन, नामांतरण और डायवर्सन, ईडब्ल्यूएस, हैसियत प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र और निवास प्रमाण पत्र सरीखे काम के लिए सरकारी फीस के अलावा सुविधा शुल्क की राशि भी तय है, जो लोग शुल्क दे देते हैं, उनके काम तो आसानी से हो रहे हैं, लेकिन जो सुविधा शुल्क नहीं देते हैं, उनके काम तहसील के अधिकारियों और कर्मचारियों ने दरकिनार रखते हुए महीनों तक नहीं किए जाते हैं। साथ ही अगर अधिकारी किसी आदेश पर दस्तखत करता है तो तो उस आदेश पर मुहर तक लगवाने के लिए सुविधा शुल्क लिया जाता है। मरता क्या न करता मजबूरी में सुविधा शुल्क देता है। इतना ही नहीं सरकारी जमीन पर अतिक्रमण हो या निजी जमीन का विवाद, सभी केसों को जरुरत से ज्यादा लंबित रखा जाता है, ताकि पीड़ित पक्ष मजबूरन सुविधा शुल्क दे। फिर भी शुल्क नहीं मिलता है, तो काम लंबित ही रहता है
कुर्साकांटा में जमीन की जमाबंदी आदि करने के लिए बिना पैसे दिए कोई काम नहीं होता है। हल्का कर्मचारी के साथ दो निजी कर्मी लगे रहते हैं। इससे भू-माफिया की यहां पर चांदी है। लेकिन इस ओर वरीय अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं।इन दोनों के कारनामे से हल्का कर्मचारी की बदनामी तो हो ही रही है साथ ही अंचलाधिकारी भी इस बदनामी से नहीं बच सकते।

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