पटना- पंचायत प्रतिनिधियों एवं सेवा प्रदाताओ का हुआ उन्मुखीकरण।

  • सहयोगी संस्था द्वारा किया गया उन्मुखीकरण
    लिंग समानता के महत्त्व पर डाला गया प्रकाश।

पटना, 21 अगस्त। सहयोगी संस्था द्वारा रविवार 21 अगस्त को पंचायत भवन, सिमरी में पंचायत प्रतिनिधि तथा सेवाप्रदाताओं का उन्मुखीकरण किया गया। लिंग समानता के महत्व के बारे में जनप्रतिनिधियों को जागरूक करने के उद्देश्य से एवं उन्हें इस विषय पर अधिक संवेदनशील बनाने के लिए उनका उन्मुखीकरण किया गया| सेवाप्रदाताओं के साथ उन्मुखीकरण का उद्देश्य यह होता है कि उनका सीधे तौर पर कार्य किशोरियों तथा महिलाओं के साथ होता है चाहे पोषण पर हो या स्वास्थ्य पर। अक्सर इस क्षेत्र में महिला ही कारगर होती हैं इसलिए महिला तथा किशोरी के मुद्दे की समझ को जागृत करने की जरुरत को समझते हुए जनप्रतिनिधियों का उन्मुखीकरण किया गया ताकि वे अपने कार्यों को बेहतर तरीके से संपादित कर सकें।
लिंग समानता के महत्त्व पर डाला गया प्रकाश:
जनप्रतिनिधियों को जेंडर/ लिंग समानता के महत्त्व के बारे में बताते हुए सहयोगी की रजनी ने बताया कि पंचायत प्रतिनिधियों एवं सेवाप्रदाताओ को अपने अधिकारों को जानने तथा उसका बेहतर उपयोग करने की आवश्यकता है क्योंकि जब तक वो खुद अपनी अधिकार नहीं समझेंगे वो समुदाय को किस प्रकार जागरूक कर पाएंगे। हमारा अधिकतर काम गाँव में होता है और वहाँ किसी प्रकार की घटना होती है या समस्या का समाधान चाहते हैं तो लोगो की उम्मीद होती है चिन्हित पंचायत प्रतिनिधि (मुखिया तथा सरपंच के पास जाते हैं), इसलिए हमारा उददेश्य यह है उन्हें जेंडर के प्रति संवेदनशील बनाने की, कि उनके पास महिला से जुड़े मुद्दे आये तो हमारे पंचायत प्रतिनिधि लोग जेंडर के नज़रिए से उसका समाधान करें।
सेवाप्रदाता को जागरूक होना जरुरी:
आंगनवाड़ी के माध्यम से हीं किशोरियों को आयरन की गोली दी जाती है तथा उनके बैठक में महावारी पर चर्चा कर उनको साफ -सफाई के बारे में बताया जाता है। आशा, आंगनवाड़ी सेविका सहायिका के साथ उन्मुखीकरण इसलिए भी जरूरी है ताकि महिलाओं की समस्याओं को वो लोग गांव की बाकी महिलाओं से अलग सोचें, जैसे कोई महिला है जो अनचाहा गर्भधारण कर चुकी है लेकिन अब उसको बच्चा नहीं चाहिए अगर आशा भी सोचेंगी कि बच्चा को नहीं मारना चाहिए गर्भ में, बच्चा भगवान का देन है, तो महिलाओं की समस्या को कौन समझेगा, हम चाहते हैं हमारी सेवाप्रदाता महिलाओं और किशोरियों की बात तथा समस्या को प्राथमिकता दें।
प्रतिभागी से चर्चा में सेक्स, जेंडर, प्रजनन स्वास्थ्य तथा महिलाओं के प्रजनन अधिकार पर चर्चा किया गया जिसमें प्रतिभागियों से यह चर्चा किया गया कि हमें किस प्रकार इन सब चीजों को अपने व्यवहार में ला कर बदलाव कर सकते हैं तथा खुद में तथा अपने समुदाय में महिला/ किशोरी की पसंद ना पसंद की बात कर सकते हैं। आयोजित प्रशिक्षण में खेल या गतिविधि से शुरू की जाती है, प्रतिभागियों ने आज जम कर भाग लिया सभी ने अपना समुदाय में पद, उम्र और कड़ी धूप को भूल कर मजे किए।

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