पटना- महिला जनप्रतिनिधियों की भूमिका को सशक्त करने पर कार्यशाला का आयोजन।

  • सहयोगी संस्था के बैनर तले निर्वाचित 26 महिला जनप्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा

पटना, 28 अगस्त: सहयोगी संस्था के सहयोग से निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों का दो दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। इस उन्मुखीकरण कार्यशाला में जिला की 26 महिला जनप्रतिनिधियों तथा हंगर प्रोजेक्ट के रिसोर्स पर्सन के रूप में शाहिना तथा सामाजिक कार्यकर्ता उर्मिला ने हिस्सा लिया।

महिला जनप्रतिनिधियों की दोहरी जिम्मेदारीः

सहयोगी संस्था की निदेशिका रजनी ने बताया कि कार्यशाला  के दौरान महिला जनप्रतिनिधियों को एक महिला जनप्रतिनिधि तथा गृहणी दोहरी जिम्मेदारी को सशक्त रूप से निर्वहन करने की जानकारी दी गयी। कई बार महिला जनप्रतिनिधियों के सामने कई बड़े सवाल होते हैं जैसे  प्रशिक्षण  के समय घर की जिम्मेदारी कैसे संभालनी है. लेकिन इस बार बड़ी संख्या में इस दो दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण में महिला जनप्रतिनिधि शामिल हुई है।  उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य महिला जनप्रतिनिधियों के समुदाय में महिला के मुद्दे तथा उनकी परेशानी को समझना और उसका समाधान निकालने का था . यह गौरतलब है कि बड़ी संख्या में राजनीति में महिलाओं की भागीदारी होने के बावजूद भी जनप्रतिनिधि के रूप में महिलाएं पंचायत में अपनी भूमिका सशक्त रूप से निभा नहीं पा रही हैं. पुरुष प्रधान समाज में महिला जनप्रतिनिधि कठपुतली की तरह काम करने को मजबूर होती हैं.

महिलाओं से जुड़ी कानूनी जानकारी साझा कीः
प्रशिक्षण के दौरान महिला जनप्रतिनिधियों से परिचय तथा एक महिला जनप्रतिनिधि के साथ घर की जिम्मेदारियों के निर्वहन में उनकी भूमिका पर सवाल भी किये गये. महिला जनप्रतिनिधियों को गतिविधियों के माध्यम से समाज तथा समुदाय के प्रति जिम्मेदारी को भी समझाया गया. प्रशिक्षण में शामिल मूसेपुर पंचायत की सरपंच सरिता देवी ने बताया कि एक महिला जनप्रतिनिधि के रूप में महिलाओं के हित में काम करना और महिला हिंसा को कम करना प्राथमिकता है. सहयोगी संस्था दवारा ऐसे प्रशिक्षण का महत्व बढ़ जाता है. प्रशिक्षण में महिला जनप्रतिनिधियों से मौलिक अधिकारों पर भी चर्चा की. साथ ही संविधान में निहित महिलाओं पर बनाये गये कानून की जानकारी साझा की.

तीन माह के कार्य का रोडमैप तैयार किया:
दो दिवसीय प्रशिक्षण में शामिल महिला जनप्रतिनिधियों ने बताया कि आने वाले तीन माह में होने वाले कार्यों का रोडमैप तैयार किया गया है और उसी अनुसार काम करना है. पद की ताकत का इस्तेमाल समुदाय के हित के लिए करना है. इसमें बाल विवाह, आर्थिक व सामाजिक समानता आदि बनाये रखने का काम मुख्य रूप से किया जायेगा. किशोरियों को लक्षित करते हुए उन्हें आवश्यक सुविधाओं, आंगनबाड़ी में बच्चों के लिए सुविधाएं सुनिश्चित कराने के साथ महिला  के अधिकारों पर जागरूकता लायी जायेगी.

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