पूर्णिया- कृषि विभाग की टीम ने पनामा बिल पर रोक का सर्वेक्षण कर किसानों को बताया उपचार की विधि।

नजरिया संवाद, संतोष यादव धमदाहा पूर्णिया। कृषि विभाग की टीम ने धमदाहा प्रखंड के रंगपुरा दक्षिण, धमदाहा घाट, ठाकुर बारी टोला, मुसहरी बिशनपुर सहित आधा दर्जन गांव में पनामा बिल्ट रोग से ग्रसित केला फसल का सर्वेक्षण किया है। जिला कृषि पदाधिकारी, वरीय वैज्ञानिक सह प्रधान वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केंद्र जलालगढ़, सहायक निदेशक पौधा संरक्षण पूर्णिया एवं प्रखंड कृषि पदाधिकारी धमदाहा की संयुक्त टीम ने धमदाहा प्रखंड के किसान डॉ. रंजन सिंह, अरुण मेहता, सत्येंद्र पाठक, प्रवीण कुमार सिंह, मारूफ, सुरेश मेहता, मोहम्मद मरगुम आलम, मोहम्मद इफ्तेखार आलम, एवं रमेश कुमार सिंह आदि किसानों के पनामा विल्ट रोग से ग्रसित अकेला फसल का सर्वेक्षण किया है। सर्वेक्षण के दौरान कृषि विभाग की टीम ने पाया कि पानी लग जाने के कारण वर्तमान में अकेला फसल में पनामा विल्ट के प्रकोप कहीं मध्यम एवं कही तीव्र गति से हुआ है। लेकिन सर्वेक्षण के दौरान रोग ग्रस्त जो केला का पौधा छिटपुट मात्रा में पाया गया है। जिसके नियंत्रण की आवश्यकता है। सर्वेक्षण के दौरान खेत में उपस्थित रहे किसानों को कृषि विभाग की टीम ने रोक रोकथाम के लिए कार्बडाजिम 50%, डब्ल्यू पी 1 ग्राम प्रति लीटर के साथ ट्राईकोडर्मा
का 4 से 5 ग्राम अथवा कार्बन डायजीम 50% डब्ल्यूबीपी 4 ग्राम का पानी प्रति लीटर की दर से गोल बनाकर केला की भूमि के सतह पर छिड़काव करने की सलाह दिया है। फसल के प्रबंधन को लेकर कृषि वैज्ञानिक ने बताया कि केला के अगले फसल लगाए जाने से पूर्व निम्न प्रबंधन अपनाए जाने से भविष्य में पनामा विल्ट रोग के रोकथाम में मदद मिलेगा। वही मिट्टी उपचार के लिए 50 किलो कम्पोस्ट या वर्मी कंपोस्ट  में 2 से 25 किलोग्राम जो ट्र्कोरडरमा मिलाकर नमी की उपस्थिति में ठंडा जगह में 10 से 15।

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