बिलकिस  बानो के गुनहगारों की रिहाई के विरोध में ऐपवा ने किया विरोध प्रदर्शन।

नजरिया संवाददाता राजकुमार

वर्ष 2002 में गुजरात दंगे  के दौरान  सामूहिक बलात्कार का शिकार हुई 21 वर्षीय बिलकिस बानो और उसकी मां के बलात्कारियों को बिना सजा पूरा किए रिहा कर देना के विरोध में   वामपंथी विचारधारा के अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला संगठन ऐपवा के कार्यकर्ताओं ने भाकपा माले के कार्यकर्ताओं के  साथ मिलकर शुक्रवार को अनुमंडल मुख्यालय के सड़कों पर रैली निकाल कर प्रदर्शन किया तथा रास चौक से अनुमंडल कार्यालय तक मार्च करने के उपरांत अनुमंडल कार्यालय के समक्ष  सभा भी हुई। और सभा के उपरांत प्रदर्शनकारियों ने अनुमंडल पदाधिकारी के हाथों में राज्यपाल के नाम मांग पत्र सौंपा। वहीं प्रदर्शनकारियों के अनुसार उम्र कैद की सजा काट रहे सात  दोषियों  को 15 अगस्त के दिन रिहा  कर दिया गया। जबकि उनकी सजा पूरी नहीं हुई है।इस संबंध में प्रदर्शनकारियों की अगुवाई कर रहे ऐपवा नेत्री जूही निशा ने कहा कि जिस सरकार के द्वारा महिला संरक्षण और उनके मान सम्मान की रक्षा करने की खोखली बातें कही  जाती  है। वही सरकार मां और बेटी के साथ सामूहिक बलात्कार करने वाले तथा उसके बच्चे को मां के सामने पटक कर मार देने वाले बलात्कारियों और हत्यारों  के साथ नरमी बरतते हुए उनकी उम्र कैद की सजा को माफ करते हुए छः वर्ष पहले ही  उसे रिहा कर देती है। यह कौन सा इंसाफ है। वहीं रिहाई का समाचार  सुनते ही बिलकिस बानो और उनके परिवार के बचे-कुचे  लोगों में भय व्याप्त हो गया है। कभी भी उनके साथ घटना घट सकती है। वहीं  श्रीमती जूही ने कहा कि हम लोग सरकार के इस कदम  की घोर निंदा करते हैं। और राष्ट्रपति से मांग करते हैं की सभी दोषियों को तब तक सजा दी जाए जितनी सजा के वे हकदार  हैं। वही इस अवसर पर कामरेड यासीन, आसमा खातुन , मुखिया  नियिज अहमद अंसारी, मो सुलतान, काजी असरार,मो आलम गीर, भादो खातुन, जरिफन बीबी, ममता खातुन,निकहत आरा इत्यादि भक्ति प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

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