बेतिया- खत्म होने के कगार पर कालाजार, इस वर्ष के तीनों मरीज हुए स्वस्थ।

– कालाजार के खात्मे के लिए 10 प्रभावित प्रखंडों में चलाया गया आइआरएस चक्र का प्रथम राउंड
– बालू मक्खी के काटने से होता है कालाजार

बेतिया। 18 अगस्त। पिछले सात सालों में जिले में कालाजार के मरीजों की संख्या में भारी कमी आयी है। वर्ष 2022 में कालाजार के कुल मरीजों की संख्या 3 थी। वह भी उपचार के बाद अब पूरी तरह स्वस्थ्य हैं। जिला भीबीडीसी पदाधिकारी डॉ हरेन्द्र कुमार ने बताया कि जिले में कालाजार उन्मूलन के लिए चलाए गए अभियान का असर अब स्पष्ट रूप से दिखने लगा है। वर्ष 2022 में जिले में कालाजार के कुल 3 मरीज मिले, जिनका उपचार किया गया है।

प्रत्येक वर्ष हो रहा एसपी पाउडर का छिड़काव-

जिला भीबीडीसी पदाधिकारी डॉ हरेन्द्र कुमार ने बताया कि कालाजार से बचाव के लिए प्रत्येक वर्ष एसपी पाउडर यानी सिंथेटिक पायरॉथायराइड का छिड़काव किया जाता है। इस वर्ष भी जिले के कालाजार प्रभावित 10 प्रखंडों के 13 राजस्व गांवों में एसपी पाउडर का छिड़काव किया गया।

अंधेरा और नमी बालू मक्खी के पनपने की जगह-

डॉ हरेन्द्र कुमार ने बताया कि कालाजार के वाहक बालू मक्खी के प्रजनन के लिए अंधेरा और नमी वाले जगह काफी उपयुक्त होती है। इसलिए विभाग चापाकल के पास भी एसपी पाउडर का छिड़काव कराती है।

लक्षण दिखने पर जांच कराना आवश्यक-

भीबीडीएस सुजीत कुमार वर्मा व केयर इंडिया के श्याम सुन्दर कुमार ने बताया कि कालाजार लिशमेनिया डोनी नामक रोगाणु के कारण होता है। जो बालू मक्खी के काटने से फैलता है। यह रोग एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भी प्रवेश कर जाता है। दो सप्ताह से अधिक बुखार व अन्य विपरीत लक्षण शरीर में महसूस होने पर अविलंब जांच कराना अति आवश्यक है। सदर अस्पताल में इलाज का समुचित प्रबंध है। यहां मरीजों का एक ही दिन में इलाज कर दिया जाता है। पिछले सात साल के आंकड़े के अनुसार,  वर्ष 2015 में 48, वर्ष 2016 में 46, वर्ष 2017 में 33, वर्ष 2018 में 24, वर्ष 2019 में 11 , वर्ष 2020 में 09, वर्ष 2021 में 11 , वर्ष 2022 (जुलाई तक) में  03 कालाजार के मरीज थे। जो अब शून्य हो गया है।

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