बेतिया- लक्ष्य से ज्यादा हुआ आईआरएस का छिड़काव।

– कालाजार से प्रभावित 11 प्रखंडों के 30 राजस्व गांवों में हुआ छिड़काव

– 3 लाख 50 हजार 720 जनसंख्या का लक्ष्य था पर ज्यादा हुआ छिड़काव
– इस वर्ष 10 कालाजार मरीज चिन्हित हुए जो पूरी तरह ठीक हुए

बेतिया,  22 नवंबर। अंतराष्ट्रीय कालाजार उन्मूलन कार्यक्रम के तहत कालाजार से प्रभावित गांवों में छिड़काव किया गया। सिविल सर्जन डॉ बिरेंद्र कुमार चौधरी ने बताया कि कालाजार के उन्मूलन के लिए आइआरएस चक्र का आयोजन वर्ष में दो बार किया जाता है। इस दौरान में घर की  दीवारों और नमी युक्त क्षेत्रों में छिड़काव किया जाता है। उन्होंने कहा कि जिले में कालाजार से प्रभावित 11 प्रखंडों में 35 पंचायत व 37 सबसेंटर बनाया गया था जिसमें चिन्हित 30 राजस्व गांवों में सिंथेटिक पायराथायराइड का छिड़काव किया गया। जो 15 सितंबर से 20 नवंबर तक चला। छिड़काव के दौरान जांच भी होता रहा जिसमें एक भी मरीज नहीं मिला।

लक्षित जनसंख्या 3 लाख 50 हजार 720 था, लक्ष्य से ज्यादा हुआ छिड़काव:

जिला भीबीडीसी पदाधिकारी डॉ हरेन्द्र कुमार ने बताया कि लक्षित जनसंख्या 3 लाख 50 हजार 720 था, जो पूरा करते हुए लक्ष्य से ज्यादा छिड़काव सुनिश्चित हुआ।उन्होंने बताया कि छिड़काव के बाद तीन महीने तक घर में रंगाई या पुताई नहीं करनी है।छिड़काव अभियान के दौरान सामुदायिक स्तर पर लोगों को कालाजार के कारण, लक्षण, बचाव एवं इसके उपचार की विस्तृत जानकारी भी दी गई।

इस वर्ष 10 कालाजार मरीज चिन्हित हुए जो पूरी तरह ठीक हुए:

जिला वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी ने कहा कि इस वर्ष कुल 10 कालाजार रोगी चिन्हित हुए जिसमें से 7 पीकेडीएल, 2 कालाजार  व एक एचआईवी कालाजार के थे। उन्हें समुचित उपचार करा कर ठीक किया गया। इन सभी रोगियों के उपचार के बाद श्रम क्षतिपूर्ण भुगतान की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।

कालाजार के लक्षण है:

दो हफ्ते से ज्यादा समय से बुखार, खून की कमी (एनीमिया) , जिगर और तिल्ल्ली का बढ़ना, भूख न लगना, कमजोरी तथा वजन में कमी होना है। सूखी, पतली, परतदार त्वचा तथा बालों का झड़ना भी इसके कुछ लक्षण है। उपचार में विलंब से हाथ, पैर और पेट की त्वचा भी काली पड़ जाती है। इसी कारण इसे कालाजार के नाम से जाना जाता है जिसका अर्थ है काला बुखार।

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