बेतिया- सरकारी दवा और शाकाहारी भोजन से टीबीमुक्त हुए सगीर मियां।

– सरकारी अस्पताल में टीबी का इलाज कराने की सलाह
– लगातार दवाइयों का सेवन जरूरी

बेतिया, 16 नवंबर। गरीब आदमी हैं सरकार… दो तीन कट्ठा जमीन है.. सरकारी राशन-पानी मिल जाता है, तो मिला-जुला कर जीवन पार हो रहा है। पिछले ही साल खांसी और बुखार से परेशान हो गए। प्रवचन में जाकर जो कमाते थे, वह भी छूट गया। अगर सरकारी अस्पताल का सहारा न होता तो आज यह शरीर नष्ट हो गया होता। यह कहते हुए सगीर मियां आसमान की तरफ देखने लगते हैं और बुदबुदाते हुए कहते हैं, पता नहीं उपर वाले ने मेरे लिए क्या सोचा है? । इसके बाद सगीर मियां कहते हैं कि खांसी लगातार और बुखार रूक-रूक कर आ रही थी। संदेह नहीं हो पाया कि टीबी है, जबकि दो तीन प्राइवेट डॉक्टरों से दिखाया। तभी एक होम्योपैथिक डॉक्टर ने कहा कि गरीब आदमी हो, जाकर मोतिहारी सरकारी अस्पताल में दिखाओ। फिर सरकारी अस्पताल और शाकाहारी भोजन से मैं ठीक हो गया।

सीटी स्कैन में पता चला टीबी:

सगीर मियां कहते हैं कि मोतिहारी अस्पताल में सीटी स्कैन और एक्स -रे हुआ।  तब पता चला कि मुझे टीबी है और सारा बलगम सूख कर फेफड़े में ही है। वहां के अस्पताल वाले ने कहा कि आप बेतिया से हैं, वहां भी यही सुविधाएं मिलेगी। मैं आपको मिलने वाली सारी सुविधाएं वहां ट्रांसफर कर देता हूं। 5 जनवरी 22 से मैंने दवा खाना शुरू किया। 1 सितंबर को मेरी दवा बंद हुई। दवा खाने के 20- 22 दिनों बाद ही मुझे राहत मिलनी शुरू  हो गयी। इसी बीच मेरी दो से तीन बार जांच भी हुई।

दवा लगातार खाने की देता हूं सलाह:

मैं अब टीबी विभाग द्वारा समुदाय को जागरूक करने के काम में भी सहयोग देता हूं। वहां जाकर मैं अपनी आपबीती सुनाता हूं। लोगों से आग्रह करता हूं कि वे सरकारी अस्पताल में मिलने वाली मुफ्त टीबी दवा और निक्षय पोषण की राशि का लाभ उठाएं। सबसे जरूरी बात है कि टीबी की दवा को लगातार खाएं।

पोषण के लिए मांसाहार जरूरी नहीं:

सगीर मियां कहते हैं कि टीबी मरीजों को पोषण की अति आवश्यकता होती है। अगर आप मांसाहार का सेवन नहीं करना चाहते हैं, तब भी किसी तरह की चिंता की बात नहीं है। आप दाल, दूध और हरी साग-सब्जियों के सेवन से भी पोषक तत्व ग्रहण कर सकते हैं।

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