मुजफ्फरपुर- ट्रिपल ड्रग थेरेपी यानी आईडीए राउंड  फाइलेरिया रोकथाम में होगा प्रभावी।

मुजफ्फरपुर। जिले को फाइलेरिया मुक्त बनाने के लिए इसी वर्ष आइडीए-एमडीए कार्यक्रम की शुरुआत हो रही. जिसमें ट्रिपल ड्रग थेरेपी के तहत डीइसी, एलबेंडाजोल, और आईवरमेक्टिन की गोली खिलाई जाएगी. यह थेरेपी फाइलेरिया रोग की जड़ पर गहरा प्रहार करेगा. फाइलेरिया पर प्रहार के लिए पहले भी एमडीए कार्यक्रम चलाया जा रहा था। जिसके तहत डीईसी और एलबेंडाजोल की दवा खिलाई जाती थी. इसमें एक और दवा आइवरमेक्टिन को जोड़ा गया है और इसका नाम आईडीए-एमडीए रखा गया है. इससे फाइलेरिया रोकथाम की मुहिम और मजबूत होगी.

राज्य के 4 जिलों में आईडीए-एमडीए राउंड:

जिला भिबीडीसी पदाधिकारी डॉ सतीश कुमार ने कहा कि राज्य के 4 जिलों में आईडीए-एमडीए राउंड चलाया जाएगा, जिसमें मुजफ्फरपुर, सारण, अरवल एवं बेगूसराय जिला शामिल है. इस अभियान के तहत 2 तरह की दवाओं की जगह 3 तरह की दवाएं खिलाई जाएंगी. घर-घर जाकर ये तीनों दवाएं लोगों को निःशुल्क खिलाई जाएगी. अभियान का नाम ही सामूहिक दवा सेवन कार्यक्रम है. इस लिहाज से दवा बांटने की जगह सभी को दवा खिलाई जाएगी. ड्रग एडमिनिस्ट्रेटर घर-घर जाकर अपने सामने लोगों को दवा खिलाना सुनिश्चित करेंगे.

डोज पोल के तहत दवा:

डॉ सतीश ने बताया कि आईडीए-एमडीए के दौरान तीन तरह की दवाएं खिलाई जाएंगी. इसलिए इसके सेवन करने वाले लोगों की उम्र भी अलग है. आइवरमेक्टिन का डोज ऊँचाई के मुताबिक एवं डीईसी एवं एलबेंडाजोल का डोज उम्र के मुताबिक ही तय किया जाना है. आइवरमेक्टिन दवा 5 साल से कम उम्र के बच्चों को नहीं दिया जाना है. जबकि डीईसी एवं एलवेंडाजोल 2 साल से नीचे के बच्चों को नहीं दिया जाएगा.

 

याद रखने योग्य बातें:

· गर्भवती महिलाएं  एवं गंभीर रूप से बीमार लोगों को दवा नहीं खानी है

· डीईसी एवं एलबेंडाजोल 2 साल से कम उम्र के बच्चों को नहीं खाना है

· आइवरमेक्टिन दवा 5 साल से कम उम्र के बच्चों को नहीं खाना है

· आइवरमेक्टिन 1 सप्ताह की धात्री माता को नहीं देना है

· ये दवाएं खाली पेट नहीं खानी है

· प्रत्येक व्यक्ति को दवा खिलाने वाले के सामने ही दवा खानी है

· एलवेंडाजोल दवा चबा कर खानी है

· दवा खाने के बाद अगर किसी तरह का कोई प्रतिकूल असर हो तो घबराएँ नहीं. जी मचलाना, सर में दर्द, पेट दर्द एवं हल्का बुखार हो सकता है. दवा खाने के बाद शरीर में मौजूद फाइलेरिया के परजीवी मरते हैं. इससे शरीर में कुछ प्रतिकूल असर दिख सकता है. दवा खाने के बाद अधिक परेशानी होने पर इसके प्रबंधन की व्यवस्था की जाती है.


फाइलेरिया की गंभीरता से बचने के लिए दवा सेवन जरुरी:

फाइलेरिया संक्रमित क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है. फाइलेरिया शरीर के कई अंगों में हो सकता है. शरीर के सभी लटकने वाले हिस्सों में फाइलेरिया हो सकता है. जिसमें पैर का सूजन( हाथीपांव), हाथ का सूजन, अंडकोष का सूजन(हाईड्रोसिल), महिलाओं के स्तन में सूजन एवं जननांग शामिल है. हाथीपांव फाइलेरिया का एक गंभीर लक्षण है. हाईड्रोसिल सर्जरी से ठीक हो जाता है. यदि हाथीपांव के शुरूआती लक्षणों को अनदेखा किया जाए तो यह फिर ठीक नहीं होता. इससे बचाव के दो ही रास्ते हैं. पहला सामूहिक दवा सेवन के दौरान सभी के द्वारा दवा का सेवन करना. वहीं, घर में एवं आस-पास साफ़-सफाई रखें ताकि मच्छर को पनपने से रोका जा सके. याद रखें, फाइलेरिया फ़ैलाने वाले मच्छर गन्दी जगहों पर रहते हैं. किसी भी व्यक्ति को संक्रमण होने पर फाइलेरिया होने में 5 से 15 वर्ष तक का समय लग सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published.