मुजफ्फरपुर- दवाओं को देना नहीं, उन्हें अपने सामने ही खिलाएंगेः  डॉ सतीश ।

– गंभीर बीमारियों से ग्रसित लोगों और गर्भवती  को नहीं खिलाई जाएगी दवा
– प्रतिकूल प्रभावों के बारे में पहले ही सचेत करेंगे स्वास्थ्य कर्मी
– फाइलेरिया सपोर्ट ग्रुप के नेटवर्क मेंबर्स आइडीए में कर रहे सहयोग

मुजफ्फरपुर। अभी तक चले आ रहे एमडीडी का स्वरूप इस बार बदल चुका है। पिछली बार हमारे स्वास्थ्य कर्मियों ने दवाईंयों को बांटा भी और कुछ को अपने सामने खिलाया भी, पर अब उन्हें दवाएं हम अपने सामने खिलाएगें। दवाओं का वितरण किसी भी कीमत पर नहीं होना है।  इसलिए इसका नाम अब एमडीए यानी मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन हो गया है। ये बातें जिला भीबीडीसी पदाधिकारी डॉ सतीश कुमार ने बीबी कॉलेजिएट में  शुक्रवार को ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर के आयोजन पर कही। डॉ सतीश ने कहा कि एमडीए के तहत ही इस बार जिले में पहली बार आइडीए की शुरुआत होगी।  जिसमें ट्रिपल ड्रग थेरेपी के तहत डीइसी, अलवेंडाजोल, और आईवरमेक्टिन की गोली खिलाई जाएगी। यह थेरेपी फाइलेरिया रोग की जड़ पर गहरा प्रहार करेगा। इसके सेवन से व्यक्ति के शरीर में फाइलेरिया के पारासाइट्स के प्रजनन और संक्रमण को कम किया जा सकेगा।

ब्लॉक लेबल के प्रशिक्षण की डीडीसी खुद करेंगे मॉनिटरिंग:

डॉ सतीश कुमार ने कहा कि 13 नवंबर तक सभी एमओआइसी को माइक्रोप्लान तैयार कर दने को कहा गया है। जिसे वह संबंधित विभागों के साथ शेयर भी कर लेंगे। इसके अलावा मॉनिटरिंग की व्यवस्था को भी काफी चाक चौबंद रखा जाएगा। एमओआइसी यह तय करेंगे की मॉनिटरिंग किसी मेडिकल ऑफिसर या स्वास्थ्य पदाधिकारी की देख रेख में प्रतिदिन के आधार पर हो।  वहीं ब्लॉक लेबल पर होने ड्रग एडमिनिस्ट्रेटर के प्रशिक्षण की डीडीसी खुद मॉनिटरिंग करेंगे।

ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर का हुआ आयोजन:

डॉ सतीश कुमार ने कहा कि आइडीए कार्यक्रम की सफलता और रूपरेखा बनाने के लिए  ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर का आयोजन किया गया है। इसमें प्रत्येक पीएचसी के चिकित्सा पदाधिकारी, बीसीएम, बीएचएम एवं केटीएस के साथ माइक्रो प्लान पर चर्चा की गयी। जल्द ही ड्रग सुपरवाइजर यानि आशा फैसिलिटेटर और उसके बाद आशा दीदियों का प्रशिक्षण होगा। उनको यह बात खास तौर पर बताई जाएगी कि दवा स्वास्थ्य कर्मियों के सामने ही खानी है। दवा को सामने खिलाने के दौरान ही स्वास्थ्य कर्मी दवा खाने से पहले ही उन्हें दवा के प्रतिकूल प्रभावों जो कि अस्थायी और तात्कालिक हैं के बारे में बताएगें।

फाइलेरिया सपोर्ट ग्रुप के नेटवर्क मेंबर्स का लिया जायजा:

जिले के मुशहरी और मीनापुर में अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ सुभाष प्रसाद और केयर की राज्य स्तरीय टीम ने बुधवार को फाइलेरिया सपोर्ट ग्रुप के नेटवर्क मेंबर्स के लोगों से मिले। फाइलेरिया सपोर्ट ग्रुप के नेटवर्क मेंबर्स फाइलेरिया से ग्रसित लोगों द्वारा संचालित एक समूह है। जो समुदाय स्तर पर फाइलेरिया रोग से बचाव और प्रबंधन पर लोगों के बीच जागरुकता फैला रहे हैं। वहीं नाइट ब्लड सर्वे और होने वाले एमडीए कार्यक्रम के बारे में लोगों को जागरुक कर रहे हैं।
जिसमें उन्होंने मीनापुर के मधुबनी की रहने वाली नेटवर्क मेंबर पूनम से फाइलेरिया पर मिल रही सुविधाओं तथा उन्हें फाइलेरिया होने के दौरान किस तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा, उसके बार में जानकारी ली। एसीएमओ ने जल्द ही उन्होंने फाइलेरिया मरीजों के लिए कुछ अच्छा करने का वचन भी दिया।

12 दिसंबर से शुरू हो सकता है आईडीए:

डॉ सतीश कुमार ने कहा कि जिले में संभवतः 12 दिसंबर से आइडीए कार्यक्रम की शुरूआत हो सकती है।एमडीए से थोड़ा अलग है इसलिए इसके सेवन की उम्र भी अलग है। इस तीनों दवाओं को 5 वर्ष के उपर वैसे बच्चों को देना है जिनकी लंबाई 90 सेमी या उससे ज्यादा हो। अगर कोई बच्चा 5 वर्ष का है और उसकी लंबाई डोज पोल के मुताबिक नहीं है तो उसे वह दवा नहीं खिलाई जाएगी। आइडीए कार्यक्रम के तहत 2 वर्ष से कम उम्र, गर्भवती, महिला, गंभीर रोग से ग्रसित व्यक्ति को यह दवा नहीं खिलानी है। वहीं दो से 5 वर्ष के बच्चे को आईवरमेक्टिन नहीं देना है।
मौके पर सिविल सर्जन डॉ यूसी शर्मा, डब्ल्यूएचओ के एनटीडी राज्य सलाहकार डॉ राजेश पांडेय, डीआइओ डॉ एके पांडेय, पीसीआइ के स्टेट कोऑर्डिनेटर अशोक सोनी, केयर के डीटीएल सौरभ तिवारी, डीपीओ सोमनाथ ओझा, भीबीडीसी पुरुषोत्तम कुमार सहित अन्य स्वास्थ्य कर्मी मौजूद थे।

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