मुजफ्फरपुर- नाइट ब्लड सर्वे में 5.47 प्रतिशत लोग मिले फाइलेरिया पॉजिटिव।

– रैंडम लोगों में मिले सबसे ज्यादा 306 पॉजिटिव
– फाइलेरिया ग्रसित लोगों के ग्रुप फैला रहे जागरूकता

मुजफ्फरपुर। जिले में पिछले महीने हुए नाइट ब्लड सर्वे की रिपोर्ट आ गयी है, जिसमें 5.47 प्रतिशत लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आयी है। नाइट ब्लड सर्वे की रिपोर्ट यह इंगित करती है कि जिले पर में फाइलेरिया मरीजों की प्रसार दर कितनी है। मालूम हो कि जिले में नाइट ब्लड सर्वे के दौरान कुल 10 हजार 492 लोगों के रक्त के नमूने लिए गए थे। इसमें कुल 596 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आयी। इसमें सेंटिनल साइट पर 290 तथा रैंडम साइट पर 306 पॉजिटिव शामिल हैं। जिला भीबीडीसी पदाधिकारी डॉ सतीश कुमार ने बताया कि इस रिपोर्ट के आधार पर शनिवार को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में डिस्ट्रिक्ट टास्क फोर्स की बैठक होगी। जिसमें होने वाले आइडीए अभियान की रूपरेखा तैयार की जाएगी।

बांद्रा में मिले सबसे ज्यादा पॉजिटिव-

डॉ सतीश ने बताया कि नाइट ब्लड सर्वे के दौरान सबसे ज्यादा माइक्रो फाइलेरिया के परजीवी बंदरा से लिए गए सैंपल में मिले हैं। नाइट सर्वे के दौरान वहां 610 लोगों के सैंपल लिए गए जिसमें 104 यानि लगभग 17.05 प्रतिशत लोग पॉजिटिव मिले। इसके बाद अर्बन इलाके में पॉजिटिविटी की दर 10 प्रतिशत के करीब है। नाइट ब्लड सर्वे के दौरान सबसे कम पॉजिटिव औराई में 1.12 प्रतिशत और साहेबगंज में 1.40 प्रतिशत मिले।

पीएसजी मेंबर्स भी खोज रहे फाइलेरिया रोगी-

डॉ सतीश ने कहा कि जिले में एक प्रयोग भी हो रहा है जिसमें फाइलेरिया मरीजों का ग्रुप खुद भी अपनी कहानी बता लोगों को फाइलेरिया के बारे में सचेत और फाइलेरिया से पीड़ित लोगों की खोज कर रही है। नाइट ब्लड सर्वे के दौरान भी गुलाब, कृष्णा, लक्ष्मी, राधा और सूरज जैसे फाइलेरिया ग्रसित लोगों के ग्रुप ने लोगों को जागरुक किया।

एक प्रतिशत से कम पर होता है ट्रांसमिशन एसेसमेंट सर्वे
डॉ सतीश ने कहा कि नाइट ब्लड सर्वे के दौरान एक प्रतिशत से कम पॉजिटिव मिलने पर उस स्थान पर दो ट्रांसमिशन असेसमेंट सर्वे होता है, अगर दो बार सर्वे के दौरान किसी में एक से ज्यादा आता है तो वहां फिर से नाइट ब्लड सर्वे होता है। बिहार में अभी तक कहीं भी ट्रांसमिशन एसेसमेंट सर्वे नहीं हुआ है। इस बार के नाइट ब्लड सर्वे के दौरान सभी प्रखंड में पॉजिटिव रेट एक से उपर है।

फाइलेरिया की गंभीरता से बचने के लिए दवा सेवन जरुरी-

फाइलेरिया संक्रमित क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है। फाइलेरिया शरीर के कई अंगों में हो सकता है।  शरीर के सभी लटकने वाले हिस्सों में फाइलेरिया हो सकता है। जिसमें पैर का सूजन( हाथीपांव), हाथ का सूजन, अंडकोष का सूजन(हाइड्रोसील), महिलाओं के स्तन में सूजन एवं जननांग शामिल है। हाथीपांव फाइलेरिया का एक गंभीर लक्षण है। हाइड्रोसील सर्जरी से ठीक हो जाता है। यदि हाथीपांव के शुरुआती लक्षणों को अनदेखा किया जाए तो यह फिर ठीक नहीं होता। इससे बचाव के दो ही रास्ते है। पहला सामूहिक दवा सेवन के दौरान सभी के द्वारा दवा का सेवन करना। वहीं, घर में एवं आस-पास साफ़-सफाई रखें ताकि मच्छर को पनपने से रोका जा सके। याद रखें, फाइलेरिया फ़ैलाने वाले मच्छर गन्दी जगहों पर रहते हैं। किसी भी व्यक्ति को संक्रमण होने पर फाइलेरिया होने में 5 से 15 वर्ष तक का समय लग सकता है।

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