मुजफ्फरपुर- फाइलेरिया मरीजों को मिला स्व-उपचार की जानकारी।

  • मुशहरी प्रखंड स्थित डुमरी पंचायत भवन में बुधनगरा और पहलादपुर के फाइलेरिया मरीजों के लिए सीफार की ओर से एमएमडीपी प्रशिक्षण का हुआ आयोजन

मुजफ्फरपुर। फाइलेरिया संक्रमित मरीजों को नियमित रूप से आवश्यक उपचार की जरूरत होती है। इसके लिए उन्हें आवश्यक दवाइयों के साथ संक्रमित अंग का पूरा ध्यान रखना होता है। ठीक तरह से ध्यान रखने पर फाइलेरिया संक्रमण को गंभीर होने से रोक जा सकता है। इसी उद्देश्य से जिले के मुशहरी प्रखंड स्थित डुमरी पंचायत भवन में बुधनगरा और पहलादपुर के फाइलेरिया मरीजों के लिए सीफार की ओर से एमएमडीपी प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें फाइलेरिया मरीजों को फाइलेरिया से बचाव एवं साफ-सफाई को लेकर विस्तार से जानकारी दी गई। फाइलेरिया से ग्रसित अंगों को विशेष रूप से सफाई के बारे में जागरूक किया। इस मौके पर सीफार एसपीसी अरूणेंदु झा, जिला समन्वयक नीतु कुमारी, प्रखंड समन्वयक रूपम कुमारी मौजूद थीं ।

फाइलेरिया को शुरुआत में ही रोका जा सकता-

एसपीसी ने बताया कि जिले में फाइलेरिया से ग्रसित मरीजों को निशुल्क दवाएं दी जा रही है। क्यूलेक्स मच्छर किसी भी व्यक्ति को काटता है तो उसे संक्रमित कर देता है। इससे या तो व्यक्ति के हाथ-पैर में सूजन की शिकायत होती है या फिर अंडकोष में सूजन आ जाती है। इसका कोई पर्याप्त इलाज संभव नहीं है। इसे शुरुआत में ही पहचान करते हुए रोका जा सकता है। इसके लिए संक्रमित व्यक्ति को फाइलेरिया ग्रसित अंगों को पूरी तरह स्वच्छ पानी से साफ करना चाहिए और सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जा रही डीईसी व अल्बेंडाजोल की दवा का नियमित सेवन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि फाइलेरिया मुख्यतः मनुष्य के शरीर के चार अंगों को प्रभावित करता है ।

फाइलेरिया से ग्रसित अंग रखे साफ-सुथरा-

कार्यक्रम में फाइलेरिया ग्रसित सभी मरीजों को स्वउपचार सीफार के स्टेट कंसल्टेंट अरूणेन्दु झा ने बताया कि फाइलेरिया संक्रमित होने पर व्यक्ति को हर महीने एक.एक सप्ताह तक तेज बुखार, पैरों में दर्द, जलन के साथ बेचैनी होने लगती है। एक्यूट अटैक के समय मरीज को अपना पैर साधारण पानी में डुबाकर रखना चाहिए या भीगे हुए धोती या साड़ी को पैर में अच्छी तरह लपेटना चाहिए।

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