मुजफ्फरपुर- मन में ठाना और कर दिखाया, साढ़े छह माह में जन्मी बच्ची को एएनएम ने दिया जीवनदान।

– जन्म के समय 700 ग्राम था वजन
– हर एक दिन बीच करती रहीं फॉलोअप

मुजफ्फरपुर। वह छोटी बच्ची थी। करीब 7 सौ ग्राम की। करीबी नहीं होने के बावजूद मुझे बहुत बुरा लग रहा था। उसकी मां को पहले से पांच बच्चियां थी। इसलिए वह लोग ध्यान भी नहीं दे रहे थे। हांलाकि बच्ची ठीक से दूध पी रही थी रिफ्लेक्शन भी था। उसके बावजूद उसके वजन के अनुसार उसे उपचार की जरुरत थी। यह कहते हुए स्वास्थ्य उपकेंद्र अहियापुर की एएनएम कुमारी सौंधी खुशबू थोड़ा गंभीर हो जाती हैं। खुद को संभालते हुए वह कहती हैं कि मैंने ठान लिया था कि मैं इस बच्ची को जीवनदान देकर ही रहूंगी। नवजात के परिजन नवजात को एसएनसीयू लेकर नहीं जा रहे थे। डॉक्टर और मेरे कितने कहने पर उस बच्चे को एसएनसीयू लेकर गयी।  उसके बाद कंगारु मदर केयर और स्वच्छता की बदौलत बच्चे का वजन चार महीने के अंदर 33 सौ ग्राम हो गया। अब वह बच्ची और मां दोनों ही स्वस्थ है।

चार माह के गर्भ का नहीं था पता-
एएनएम खुशबू कहती हैं, आशा शहनाज खातून नवजात की मां बबीता को एएनएम कुमारी सौंधी खुशबू के पास नियमित टीकाकरण के सत्र पर लेकर आयी थी। उसे चार महीने से मासिक नहीं आया था। उसे पता भी नहीं था कि वह गर्भवती है। एएनएम खुशबू ने तुरंत उसकी प्रेगनेंसी चेक की। वह गर्भवती थी। खुशबू कहती हैं कि वह गरीब परिवार से थी, तुरंत मैंने उसका पंजीकरण कर ब्लड शुगर, एनीमिया एडिमा के अलावे अन्य जांच की। वह एनीमिक निकली। इसके बाद मैंने उसे आयरन, कैल्शियम की 200 गोलियां दी और अच्छे खानपान की सलाह भी।

बनाती रही बहाना-
एएनएम खुशबू ने बबीता को टिटनेस के दोनों डोज भी लगाए। दूसरे डोज के समय एएनएम खुशबू ने बबीता से दवा के बारे में पूछा उसने दवा खाने पर गैस का बहाना कर दिया। जिसका बुरा असर मई में हुआ। खुशबू कहती हैं कि जब मैं फिर से नियमित टीकाकरण साइट पर गयी, तब बबीता पांच दिन से ब्लीडिंग की शिकायत लेकर आयी। साहेबगंज पीएचसी से उपचार के बाद वह स्वस्थ हुई।
साढ़े छह महीने में हुआ प्रसव
खुशबू कहती हैं  प्रेग्नेंसी का छह माह ही था कि 10 मई को उसे लड़की हुई। अगले ही दिन मैं उसके घर गयीए वजन किया तो 7सौ ग्राम था। हालांकि वह अच्छे से दूध पी रही थीए रो रही थी वहीं उसका रिफ्लेक्शन भी अच्छा था। मैंने उसे कंगारु मदर केयर की सलाह दी और एसएनसीयू में रेफर किया।

जब छठी लड़की होने पर किया इग्नोर-
खुशबू कहती हैं कि मैं बबीता की निरंतर फॉलोअप कर रही थी। बच्चे के कम वजन होने पर पीएचसी के चिकित्सक और मैंने भी एसएनसीयू में रेफर कियाए पर पांच लड़कियों के होने के कारण वह ध्यान नहीं दे रही थी। लगातार तीन दिनों तक मैंए सेविका रुबी गुप्ता, आशा शहनाज खातून और केयर के सतीश कुमार ने एसएनसीयू ले जाने के लिए समझाया। उसके बाद 13 मई को वह बच्ची एसएनसीयू में एडमिट हुई। सात दिनों में उसे छुट्टी दे दी गयी।

प्रत्येक आरोग्य दिवस पर लेती रही हालचाल-
केयर के सतीश कुमार ने बताया कि एसएनसीयू से मिले डिस्चार्ज के बाद फिर से कंगारू मदर केयर स्वच्छता के बारे में बताया गया। वहीं एएनएम खुशबू प्रत्येक नियमित टीकाकरण के साइट पर जाने के क्रम में बबीता का हाल चाल लेती। 8 सितंबर को उसे बीसीजी का टीका भी लगा क्योंकि उसका वजन अब 33 सौ ग्राम था। बीसीजी का टीका दो किलो से ज्यादा होने पर ही लगता है। अब बच्ची और उसकी मां स्वस्थ और सुरक्षित है। सतीश कहते हैं कि यह व्यवहार परिवर्तन का एक अच्छा उदाहरण है कि ऐसी मां जो अपने बच्चे के लिए भावशून्य थी वहीं एक स्वास्थ्यकर्मी जिन्होंने अपने कार्य को एक चुनौती की तरह स्वीकार भी किया।

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