मोतिहारी- एमडीए कार्यक्रम को ले कर्मियों का एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित।

-जिले में जल्द शुरू होगा नाइट ब्लड सर्वे।
-लैब टेक्नीशियन को किया गया प्रशिक्षित।

मोतिहारी। जिले में फाइलेरिया उन्मूलन को जड़ से खत्म करने को लेकर जल्द ही नाइट ब्लड सर्वे अभियान चलाया जाएगा। अभियान को सफल बनाने के लिए जीएनएम पारा मेडिकल ट्रेनिंग सेंटर में कर्मियों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण डीभीडीसीओ डॉ शरत चन्द्र शर्मा के निर्देशन में किया गया। प्रशिक्षण में उपस्थित प्रखंडो के लैब टेक्नीशियन को कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश गए। इस दौरान केयर डीपीओ मुकेश कुमारए भीडीसीओ धर्मेंद्र कुमार ने सभी प्रखंडों से आए लैब टेक्निशियन को प्रशिक्षण संबंधी महत्वपूर्ण विषयों व नाइट ब्लड सर्वे के बारे में जानकारी दी।

फाइलेरिया के परजीवी रात में होते हैं सक्रिय-

जिला भीबीडी नियंत्रण पदाधिकारी डॉ शर्मा ने बताया कि जिले में नाइट ब्लड सर्वे की तैयारी शुरू कर दी गयी है। प्रत्येक प्रखंड में एक रैंडम और एक सेंटीनल साइट पर नाइट ब्लड सर्वे किया जाएगा। इस दौरान लोगों के ब्लड सैंपल लिए जाएंगे। जिसे जांच के लिए लैब भेजा जाएगा। चूंकि खून में फाइलेरिया के परजीवी रात में ही सक्रिय होते हैं। इसलिए नाइट ब्लड सर्वे से सही रिपोर्ट पता चल पाता है। नाइट ब्लड सर्वे के लिए चार सदस्यीय टीम बनाई जाएगी।

सामान्य और स्वस्थ दिखने वाले व्यक्ति भी करा सकते हैं जांच-

पीसीआई के मनोज कुमार ने बताया कि इस कार्यक्रम के तहत फाइलेरिया के प्रसार को रोकना है। नाइट ब्लड सर्वे के दौरान सामान्य और स्वस्थ दिखने वाले व्यक्ति भी जांच करा सकते हैं। उन्होंने बताया कि फाइलेरिया या हाथी पांव के लक्षण सामान्यत शुरू में दिखाई नहीं देते हैं। इसके परजीवी शरीर में प्रवेश करने के बाद इसके लक्षण लगभग पांच से दस सालों बाद दिखाई दे सकते हैं। इसलिए सामान्य और स्वस्थ दिखने वाले व्यक्ति भी इसकी जांच कराएं। फाइलेरिया एक घातक बीमारी है। ये साइलेंस रहकर शरीर को खराब करती है। फाइलेरिया एक परजीवी रोग हैए जो एक कृमि जनित मच्छर से फैलने वाला रोग है। यह मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से फैलता है। आमतौर पर फाइलेरिया के लक्षण स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देतेए लेकिन बुखारए बदन में खुजली व सूजन की समस्या दिखाई देती है। इसके अलावा पैरों और हाथों में सूजनए हाथी पांव और हाइड्रोसिल अंडकोषों की सूजनए फाइलेरिया के लक्षण हैं। फाइलेरिया हो जाने के बाद धीरे.धीरे यह गंभीर रूप लेने लगता है। इसका कोई ठोस इलाज नहीं है। लेकिन इसकी नियमित और उचित देखभाल कर जटिलताओं से बचा जा सकता है।

जिले में फाइलेरिया की स्थिति का लगेगा पता-

सिविल सर्जन डॉ अंजनी कुमार ने बताया कि नाइट ब्लड सर्वे की गतिविधियों का आयोजन करने का मुख्य उद्देश्य प्रखंड स्तर पर फाइलेरिया व माइक्रो फाइलेरिया की दर को जानना है। नाइट ब्लड सर्वे से यह पता चलेगा कि जिले भर में कितने लोगों में फाइलेरिया का पैरासाइट मौजूद है। फाइलेरिया का पारासाइट रात में ही सक्रिय होता है। इसलिए नाइट ब्लड सर्वे रात 8 बजे से 12 बजे रात के बीच ही ब्लड सैंपल लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि नाइट ब्लड सर्वे अभियान के तहत रक्त संग्रह केंद्रों पर ग्रामीणों को बुलाने के लिए आशा कार्यकर्ता और आंगनबाड़ी सेविकाओं सहित अन्य कर्मियों का सहयोग लिया जाएगा। अभियान की सफलता के लिए गांव स्तर पर विभिन्न माध्यमों से जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इस मौके पर डीभीडीसीओ डॉ शरत चन्द्र शर्मा, केयर डीपीओ मुकेश कुमार, पीसीआई के मनोज कुमार, भीडीसीओ धर्मेंद्र कुमार, सीफार के डीसी सिद्धान्त कुमार, डब्ल्यू एचओ के जोनल कॉर्डिनेटर डॉ माधुरी कुमारी समेत कई प्रखंडों के लैब टेक्नीशियन उपस्थित थे।

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