मोतिहारी- पीकेडीएल के कारण चेहरे पर दाग-धब्बों के बाद भी रूपकली ने नहीं हारी हिम्मत।

– कराया इलाज, अब है स्वस्थ

मोतिहारी, 19 अगस्त। जिले के हरसिद्धि प्रखंड के ग्राम-कुबरा, वार्ड नम्बर-17, पंचायत-पकड़िया, निवासी रुपकली कुमारी, पिता-शारदा सहनी, जो लगभग 14 वर्षीया युवती है, कुछ महीने पहले पीकेडीएल की चपेट में आ गई। इससे उसे काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। कई जगह इलाज कराई। आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। फिर भी उसने हिम्मत नहीं हारी और अपना इलाज स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर करवाया। अब वह पहले से स्वस्थ है।

रूपकली ने हिम्मत नहीं हारी, इलाज कराकर हुई स्वस्थ-

रूपकली कहती है कि उसे पता नहीं चल रहा था कि उसे क्या हो रहा है? उसके चेहरे पर धब्बे एवं फोड़े निकलने शुरू हो गए थे। जब उसने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हरसिद्धि पर जाकर दिखाया तो उसे बताया गया कि वह पीकेडीएल से होने वाली एक प्रकार के स्किन की बीमारी से पीड़ित हो गई है। चेहरे पर दाग धब्बों के बाद भी रूपकली ने हिम्मत नहीं हारी और कालाजार के मरीज खोज अभियान के दौरान भीडिसीओ धर्मेंद्र कुमार और स्वास्थ्य विभाग की टीम से सहयोग लेकर हिम्मत से इलाज कराया। रूपकली 28 दिनों के इलाज के बाद अब पहले से स्वस्थ है। भीडिसीओ धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि रूपकली व अन्य कालाजार से प्रभावित लोगों को स्वास्थ्य विभाग के निर्देश के पालन करते हुए फॉलोअप किया जाता है। उनकी स्थितियों का गहनता से निरीक्षण करते हुए इलाज में सहयोग प्रदान किया जाता है। वहीं रूपकली बताती है कि सरकारी स्वास्थ्य केंद्र से प्राप्त दवा का सेवन कर अब काफी हद तक ठीक हो चुकी है। उसके चेहरे के दाग़ धब्बे मिटने लगे हैं।

स्वास्थ्य केंद्र से इलाज करवाकर है संतुष्ट-

रूपकली कुमारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, हरसिद्धि में इलाज कराकर संतुष्ट है। रूपकली ने बताया कि उसे डॉक्टर द्वारा दिए गए परामर्श के अनुसार 84 दिनों तक दवा का सेवन करने के लिए कहा गया है।

पीकेडीएल की पहचान-

भीडिसीओ धर्मेंद्र कुमार बताते हैं कि कोई भी व्यक्ति जिसे पहले कालाजार हुआ हो और उसके शरीर के किसी भाग पर हल्के रंग के धब्बे या छोटी-छोटी गांठ दिखाई दे, जिन्हें छूने पर महसूस हो, वह पीकेडीएल का केस हो सकता है। उन्होंने बताया कि कालाजार के इलाज के लिए 4000 रुपया भारत सरकार की ओर से मदद दी जाती है। उन्होंने बताया कि पीएचसी तथा जिला वीबीडीसीओ कार्यालय के पदाधिकारी एवं कर्मी द्वारा सतत रूप से सभी भिएल/पीकेडीएल पीटी का अनुश्रवण किया जाता है। साथ ही कालाजार के मरीजों की खोज की जाती है।

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