वैशाली- कुछ महीनों में बदला दिखेगा सदर अस्पताल का स्वरूप, स्वच्छ व व्यवस्थित दिखेगा परिसर।

– जिलाधिकारी ने निरीक्षण के बाद दिए निर्देश
– माइक्रो प्लान बनाकर किया जाएगा परिसर को विकसित

वैशाली। 12 सितंबर, सदर अस्पताल परिसर को सुंदर, व्यवस्थित तथा स्वच्छ रखने के उद्देश्य से जिलाधिकारी यशपाल मीणा ने सोमवार को सदर अस्पताल का निरीक्षण किया, जिसमें उन्होंने सिविल सर्जन को इंफ्रास्ट्रकचर से संबंधित कुछ आवश्यक निर्देश दिए। इस निर्देश के कुछ महीनों बाद सदर अस्पताल का स्वरूप बदला बदला सा दिख सकता है। माइक्रो प्लान बनाकर इसे विकसित किया जाएगा।
जिलाधिकारी डॉ यशपाल मीणा ने सोमवार को सिविल सर्जन डॉ एके शाही तथा डीपीएम मणिभूषण झा को अपने कार्यालय में बुलाया था। जिसमें उन्होंने अस्पताल की सुविधाओं को लेकर चर्चा की थी। इसके बाद जिलाधिकारी खुद सदर अस्पताल पहुंच गए। जहां उन्होंने स्वच्छता, पार्किंग, ओपीडी प्रतीक्षालय व हेल्प डेस्क बनाने सहित अन्य निर्देश दिए।

मुख्य द्वार पर हेल्प डेस्क की व्यवस्था-

जिलाधिकारी यशपाल मीणा ने सिविल सर्जन को निर्देश देते हुए कहा कि सदर अस्पताल के साधारण बोर्ड की जगह ग्लो साइन वाला बोर्ड लगाएं। वहीं गार्ड के लिए बने पक्के रुम को तोड़कर वहां पर हेल्प डेस्क की स्थापना की जाए। इसके अलावा डीएचएस की दिवाल को तोड़कर मुख्य मार्ग को और चौड़ा किया जाए।

परिसर में दिखेगी हरियाली-

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने इमरजेंसी बिल्डिंग तथा डब्ल्यूएचओ के भवन को तोड़कर वहां पर पार्क विकसित किए जाने का निदेश दिया। वहीं परिसर को हरा -भरा दिखने के लिए पूरे अस्पताल परिसर के खाली जगहों पर पेड़- पौधे लगाए जाएगें।

ओपीडी में क्राउड कंट्रोल-

ओपीडी में स्त्री रोग विभाग के पास जमा भारी भीड़ को व्यवस्थित  करने के लिए जिलाधिकारी ने बाहर के जगहों में प्रतीक्षालय बनाने के निदेश दिए। इसके अलावे नए बन रहे भवन को मरीजों को समर्पित करने के सवाल पर बीएमएससीआइएल के अधिकारियों ने दो महीनों में इसे पूरी तरह जनता को सौंप देने की बात कही। इसके अलावा अस्पताल कर्मियों तथा आमजन के लिए पार्किंग की व्यवस्था के बारे में भी जिलाधिकारी ने निर्देश दिए।

माइक्रो प्लान किया जाएगा तैयार-

डीपीएम मणि भूषण कुमार झा ने कहा कि जिलाधिकारी के निर्देशों के आलोक में उन्होंने निश्चित टाइमलाइन और माइक्रो प्लान के साथ जल्द ही रिपोर्ट मांगी है, ताकि सदर अस्पताल के परिदृश्य को पूरी तरह नया और मरीज फ्रेंडली बनाया जाए।

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