सिमराही- आयोजित सत्संग को संबोधित करते  पूज्यपाद बाबा आशुतोष गुरु स्नेही  ने कहा कि ज्ञान योग युक्त ईश्वर भक्ति का प्रचार- प्रसार करना ही संतमत सत्संग का उद्देश्य है।

सिमराही राघोपुर। राघोपुर प्रखंड क्षेत्र के केएन इंटर कालेज राघोपुर  में आयोजित संतमत सतसंग का 8 वां जिला वार्षिक अधिवेशन शुक्रवार की संध्या संपन्न हो गया। दो दिवसीय सत्संग सह प्रवचन कार्यक्रम समापन पर हजारों की संख्या में सत्संगप्रेमी शामिल हुए।श्रधालुओं के लिय भव्य पंडाल की व्य्बस्था के साथ महिला पुरुष के लिय अलग शौचालय, स्नानागार आदी की भी व्य्बस्था की गयी थी.आयोजित सत्संग को संबोधित करते  पूज्यपाद बाबा आशुतोष गुरु स्नेही  ने कहा कि ज्ञान योग युक्त ईश्वर भक्ति का प्रचार- प्रसार करना ही संतमत सत्संग का उद्देश्य है। कहा की गुरु की कृपा पाकर राम भक्ति मुक्ति का सबसे अच्छा मार्ग है, कहा की राम के दो रूप है एक सगुण और दुसरा निर्गुन, सगुण रूप परिधरि है, निर्गुन भक्ति से मोक्ष की प्राप्ति है, कहा की राम के दोनो भक्ति को पाने के लिय गुरु कृपा जरुरी है.    ताकि संसार में सभी जिव जगत का कल्याण हो सके, और मनुष्य को  सुख-शांति, बल,वैभव  की प्राप्ति हो सके। कहा की परम स्नेही संत सदगुरू महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के  मुखार्वृंद से  कहा गया था कि  बिन दया संतन के मेहीं
जानना इस राह को, हुआ नहीं होता नहीं होनहारा है नहीं कोई, संतमता बिनु गति नहीं सुनु सकल दे कान। जो चाहे उद्धार को बनो संत का संतान अर्थात बिना संतों की दया के इस संसार से पार उतरना मुश्किल है। यदि संसार में सुख शांति चाहते हैं तो संतों के बताये मार्ग पर चलना ही होगा।उन्होने कहा की कान खोलकर सुन लो यदि कोई भी ब्यक्ति  अपना व इस संसार का  कल्याण चाहता है तो  संत के शरणागत होकर सदमार्ग को अपनाना हीं होगा। दो दिवसीय इस संतमत सत्संग कार्यक्रम को अनील बाबा, कमलेश्वरि बाबा, बसंत वैरागी बाबा सहित अन्य आदी बाबा  ने अपने आशीर्वचनों से श्रद्धालुओं को मानवता का पाठ पढाया।
आयोजित कार्यक्रम मे हजारो  श्रधालुओ ने महाप्रसाद ग्रहण किया.वहीं इस कार्यक्रम  को सफल बनाने मे स्वागत समिति के अध्यक्ष पुर्व प्राचार्य प्रो कमल प्रसाद यादव, उपाध्यक्ष सुरेश प्रसाद यादव, सचिव सुन्दर लाल मेहता, भूपेन्द्र मंडल, संतमत सत्संग माहसभा के अध्यक्ष सच्चिदानंद जी, महामंत्री प्रकाश प्राण जी, जिला समिति अध्यक्ष जगदीश ठाकुर जी, उपाध्यक्ष, प्रो  रामकुमार कर्ण जी, सत्यम कुमार चौधरी  रूप नरायन दास जी आदी का सरहनीय योगदान रहा।

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