सीतामढ़ी- एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम में तेजी।

  • जिला प्रतिरक्षण कार्यालय में जिले को एनीमिया मुक्त करने पर हुई आवश्यक चर्चा

सीतामढ़ी। 31 अगस्त। एनीमिया से जहां शिशुओं का शारीरिक एवं मानसिक विकास अवरुद्ध होता है, वहीं किशोरियों एवं माताओं में कार्य करने की क्षमता में कमी आती है। इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए राष्ट्रीय पोषण अभियान के अंतर्गत ‘एनीमिया मुक्त भारत’ कार्यक्रम की शुरुआत की गयी है। जिले में इस अभियान को तेजी देने के लिए स्वास्थ्य विभाग गंभीर है। जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. एके झा ने बताया कि एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम को अब रणनीति के तहत आगे बढ़ाया जाएगा। इसको लेकर उनके कार्यालय में बुधवार को एक बैठक हुई। जिसमें 6 विभिन्न आयु वर्ग के समूहों को चिह्नित कर उन्हें एनीमिया से मुक्त करने की दिशा में आवश्यक चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि एनीमिया मुक्त भारत बनाने के लिए समन्वय बना कर काम करने की जरूरत है। स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग व आइसीडीएस के साथ मिलकर गर्भवती, धातृ माता व किशोर-किशोरियों को आयरन की गोली खिलायी जा रही है।

विद्यालय एवं आंगनबाड़ी केंद्रों पर दी जाती है नि:शुल्क दवा-

जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. एके झा ने बताया कि छह से 59 माह के बच्चों को सप्ताह में दो बार आयरन फोलिक एसिड (आईएफए) सिरप एक एमएल आशा द्वारा गृह भ्रमण के दौरान दिया जा रहा है। जबकि 5-9 साल के बच्चों को सप्ताह में गुलाबी आयरन फोलिक एसिड की एक गोली प्राथमिक विद्यालय में प्रत्येक बुधवार को मध्याह्न भोजन के बाद शिक्षकों के माध्यम से दिया जा रहा है। विद्यालय नहीं जाने वाले लडके-लडकियों को आशा के माध्यम से दवा की खुराक दी जाती है। 10 से 19 साल के किशोर और किशोरियों को हर हफ्ते आईएफए की एक नीली गोली दी जाती है। जिसे विद्यालय एवं आंगनबाड़ी केन्द्रों पर प्रत्येक बुधवार को भोजन के बाद शिक्षकों एवं आंगनबाड़ी सेविका के माध्यम से निःशुल्क प्रदान की जाती है।

एनीमिया मानसिक-शारीरिक क्षमता को प्रभावित करता है-

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण पांच के अनुसार, सीतामढ़ी जिले में 6 से 59 माह के 70.0 प्रतिशत बच्चे, महिलाएं 15 से 19 आयु वर्ग की 61.4 प्रतिशत एवं 15 से 49 आयु वर्ग की  61.7 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से ग्रसित हैं। डॉ. झा ने कहा कि इस अभियान के तहत 6 विभिन्न आयु वर्ग की महिलाओं और बच्चों को लक्षित किया गया है। इस कार्यक्रम के तहत एनीमिया में प्रतिवर्ष 3 प्रतिशत की कमी लाने का लक्ष्य है।

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