सीतामढ़ी- एसएनसीयू शिशु मृत्यु दर में कमी लाने में साबित हो रहा मील का पत्थर

  • जून में 58 बच्चे, जुलाई में 81 और अगस्त में 75 नवजातों को बेहतर इलाज देकर असमय काल के गाल में समाने से बचाया गया

सीतामढ़ी। 28 सितंबर । जिलेकी स्वास्थ्य सेवाएं अपनी बेहतरी की ओर लगातार आगे बढ़ रही हैं। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार व्यवस्था के सुधार में लगी है। सदर अस्पताल में संचालित एसएनसीयू (स्पेशल न्यू बोर्न केअर यूनिट) स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण को दर्शाता है। एसएनसीयू नवजात शिशुओं की बेहतर देखभाल एवं उनका समुचित इलाज कर नया जीवन देने में कारगर साबित हो रहा है। एसएनसीयू के नोडल डॉ हिमांशु शेखर ने बताया कि इस वर्ष जून में 58 बच्चे, जुलाई में 81 और अगस्त में 75 नवजातों को बेहतर इलाज देकर असमय काल के गाल में समाने से बचाया गया है। उन्होंने बताया कि एसएनसीयू सरकारी अस्पताल में जन्म लेने वाले बच्चों के लिए तो कारगर साबित हो ही रहा है, निजी अस्पतालों में जन्मे बच्चों के लिए भी जीवन रक्षक साबित हो रहा है। लोग अब निजी अस्पताल की सुविधाओं को छोड़ सरकारी अस्पताल में मौजूद एसएनसीयू पर पूरा भरोसा कर रहे हैं और नवजात शिशुओं को सदर अस्पताल के एसएनसीयू में ही भर्ती करवा रहे हैं।

निजी हुआ फेल तो एसएनसीयू में बची जान-

कुछ दिन पहले ही रिगा की एक नन्ही परी को एसएनसीयू के जरिए नया जीवन मिला है। यह मासूम जब 4 दिन की थी तो निजी क्लिनिक के डॉक्टरों ने परिवार को कह दिया था कि बच्ची का बचना मुमकिन नहीं है, क्योंकि इसका ऑक्सीजन लेवल और वजन काफी कम था। नाजुक हालत में बच्ची को सदर अस्पताल के एसएनसीयू में एडमिट कराया गया। एसएनसीयू के डॉक्टरों ने हिम्मत नहीं हारी और लगातार प्रयास किया। 10 दिनों के बाद बच्ची पूरी तरह से स्वस्थ होकर घर लौट गई। एसएनसीयू के डॉ ओमकान्त शर्मा ने बताया कि बच्ची निजी अस्पताल में जन्म ली थी। निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने बच्ची के परिवार के लोगों से कहा कि यह बच्ची बच नहीं पाएगी। लेकिन हमने उम्मीद नहीं छोड़ी। बेहतर इलाज और पूरे स्टाफ ने भरसक प्रयास किए। जिसके कारण बच्ची की जान बचाई जा सकी। जब एक मां नवजात बच्चे को शौचालय में छोड़कर चली गई, तो फिर एसएनसीयू ने उसकी जान बचा ली।  कहते हैं न ‘जाको राखे साइयां मार सके ना कोई’। यह सही साबित हुई। मासूम का इलाज एसएनसीयू में हुआ। अब वह पूरी तरह स्वस्थ है।

शिशु मृत्यु दर में कमी लाने में साबित हो रहा  मील का पत्थर-

अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ.एके झा ने बताया कि अत्याधुनिक सुविधाओं वाला एसएनसीयू बच्चों के इलाज के साथ शिशु मृत्यु दर में कमी लाने में मील का पत्थर साबित हो रहा है। इस यूनिट में प्रतिमाह लगभग 100 नवजात बच्चों का इलाज हो रहा है तथा उन्हें असमय काल के गाल में समाने से बचाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि एसएनसीयू वार्ड में 0 से 28 दिन तक के बच्चों को भर्ती किया जाता है। एसएनसीयू में 24 घंटे चिकित्सक के साथ स्टाफ नर्स तैनात रहती हैं, जो शिशु के एडमिट होने के साथ ही उनकी सेवा में तत्परता से जुट जाती हैं। एसएनसीयू में कुल 12 बेड लगाये गए हैं। एसएनसीयू में विशेषज्ञ चिकित्सक सहित कुल पांच चिकित्सक, 12 स्टाफ नर्स और 5 ममता नियुक्त हैं। एसएनसीयू में रेडियो वॉर्मर, ऑक्सीजन की सुविधा के साथ साथ जॉन्डिस से पीड़ित बच्चों के लिए फोटो थैरेपी की सुविधा भी उपलब्ध है।

ये सुविधाएं हैं उपलब्ध:

– शिशुओं को गरम रखने के लिए रेडियेंट वार्मर
– अल्ट्रावायलट लाइट के लिए फोटो थैरेपी यूनिट
– नवजातों के एक्सरे के लिए पोर्टेबल एक्स-रे यूनिट
– नवजातों को ऑक्सीजन देने के लिए ऑक्सीजन यूनिट

ऐसे नवजात एसएनसीयू में होते हैं भर्ती:

– 1800 ग्राम या इससे कम वजन के नवजात
– गर्भावस्था के 34 सप्ताह से पूर्व जन्में बच्चे
– जन्म के समय गंभीर रोग से पीड़ित नवजात (पीलिया या कोई अन्य गंभीर रोग)
– जन्म के समय नवजात को गंभीर श्वसन समस्या
– हाइपोथर्मिया
– नवजात में रक्तस्राव का होना
– जन्म से ही नवजात को कोई डिफेक्टस होना

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