सीतामढ़ी- प्रखंड स्तर पर होगा नाइट ब्लड सर्वे का काम।

– फाइलेरिया उन्मूलन मुहिम को लेकर विभाग सजग
– प्रखंडों में फाइलेरिया की स्थिति का चलेगा पता

सीतामढ़ी। 26 अगस्त। फाइलेरिया उन्मूलन मुहिम को लेकर जिले में स्वास्थ्य विभाग सजग है। जिले को फाइलेरिया मुक्त बनाने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग लगातार प्रयास कर रहा है। एक तरफ जहां जिलेभर में फाइलेरिया क्लिनिक (एमएमडीपी) की शुरुआत की जा रही है। वहीं अब अगले महीने से प्रखंड स्तर पर नाइट ब्लड सर्वे का काम शुरू किया जाएगा। जिला भीबीडी नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. रवीन्द्र कुमार यादव ने बताया कि वेक्टर बॉर्न डिजीज कंट्रोल की गाइडलाइन के आधार पर राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन अभियान कार्यक्रम के तहत अब नाइट ब्लड सर्वे का काम प्रखंड स्तर पर किया जाएगा। जिसमें प्रत्येक प्रखंड में एक रैंडम और एक सेंटीनल साइट पर नाइट ब्लड सर्वे किया जाएगा। पहले यह हर वर्ष जिला स्तर पर ही तय चार रैंडम और चार सेंटिनल जगहों पर नाइट ब्लड सर्वे सैंपल लिया जाता था।

प्रखंडों में फाइलेरिया की स्थिति पता चलेगा-

डॉ. रवीन्द्र कुमार यादव ने कहा कि नाइट ब्लड सर्वे की गतिविधियों का आयोजन करने का मुख्य उद्देश्य प्रखंड स्तर पर फाइलेरिया व माइक्रो फाइलेरिया की दर को जानना है। नाइट ब्लड सर्वे से यह पता चलेगा कि कितने लोगों में फाइलेरिया का पैरासाइट मौजूद है। फाइलेरिया का पारासाइट रात में ही सक्रिय होता है। इसलिए नाइट ब्लड सर्वे में 8-12 बजे रात  के बीच ही ब्लड सैम्पल लिया जाता है। इसमें 20 साल से ऊपर के लोगों का रक्त नमूना जांच के लिए लिया जाएगा। जिससे पता चल सकेगा कि प्रखंडों में फाइलेरिया की स्थिति क्या है। उन्होंने बताया कि प्रखंड स्तर पर नाइट ब्लड सर्वे के लिए सूक्ष्म कार्य योजना तैयार की जा रही है।

सामान्य और स्वस्थ दिखने वाले व्यक्ति भी जांच कराएं-

डॉ. रवीन्द्र कुमार यादव ने कहा कि फाइलेरिया या हाथी पांव के लक्षण सामान्यता शुरू में दिखाई नहीं देते हैं। इसके परजीवी शरीर में प्रवेश करने के बाद इसके लक्षण लगभग पांच से दस सालों बाद दिखाई दे सकते हैं। इसलिए सामान्य और स्वस्थ दिखने वाले व्यक्ति भी इसकी जांच कराएं। फाइलेरिया एक घातक बीमारी है। ये साइलेंस रहकर शरीर को खराब करती है। फाइलेरिया एक परजीवी रोग है जो एक कृमि जनित मच्छर से फैलने वाला रोग है। यह मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से फैलता है। आमतौर पर फाइलेरिया के लक्षण स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते, लेकिन बुखार, बदन में खुजली व सूजन की समस्या दिखाई देती है। इसके अलावा पैरों और हाथों में सूजन, हाथी पांव और हाइड्रोसिल (अंडकोषों की सूजन) फाइलेरिया के लक्षण हैं।  फाइलेरिया हो जाने के बाद धीरे-धीरे यह गंभीर रूप लेने लगता है। इसका कोई ठोस इलाज नहीं है, लेकिन इसकी नियमित और उचित देखभाल कर जटिलताओं से बचा जा सकता है।

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