सीतामढ़ी- फाइलेरिया से बचाव के लिए 12 दिसम्बर से एमडीए अभियान, खिलायी जाएगी डीईसी-अल्बेंडाजोल की गोली।

  • भीबीडी नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. रवींद्र यादव ने कहा- योग्य व्यक्ति दवा का सेवन जरूर करें, जागरूकता फैलाने के लिए बैनर, पोस्टर और दीवाल लेखन किया जा रहा

सीतामढ़ी। 21 नवंबर। फाइलेरिया या हाथी पांव रोग से बचाने के लिए जिले में फाइलेरिया रोग उन्मूलन कार्यक्रम चलाया जाएगा। इसके तहत 12 दिसम्बर से फाइलेरिया से बचाव हेतु सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम चलाया जाएगा। अभियान के दौरान 2 वर्ष से छोटे बच्चे, गर्भवती स्त्री और गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति को छोड़ सभी को दवा खिलायी जाएगी। आशा कार्यकर्ता और आँगनबाड़ी सेविका घर-घर जाकर दवा खिलायेंगी। जिला भीबीडी नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. रवीन्द्र कुमार यादव ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग फाइलेरिया उन्मूलन के लिए प्रतिबद्धता के साथ हर स्तर पर सार्थक प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि फाइलेरिया उन्मूलन के लिये शुरू होने वाले एमडीए राउंड के दौरान सभी योग्य व्यक्ति दवा का सेवन करें, जिससे जिला कालाजार की तरह फाइलेरिया से भी उन्मूलन हो सके।

दो प्रकार की दवा खिलायी जाएगी

डॉ रवींद्र यादव ने कहा कि एमडीए अभियान को सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग संकल्पित है। अभियान की सफलता के लिए माइक्रो-प्लान बनाया जाएगा। फाइलेरिया उन्मूलन अभियान के तहत घर-घर जाकर लोगों को फाइलेरिया से बचाव के लिए दो प्रकार की दवा खिलायी जाएगी। इस दौरान आशा और आंगनबाड़ी अपनी निगरानी में ही दवा खिलाएंगी। जिसमें डीईसी एवं अल्बेंडाजोल की दवा शामिल है। दवा गर्भवती महिलाओं एवं गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति के अलावा दो वर्ष से कम आयु वर्ग के बच्चों को छोड़कर शेष सभी लोगों को खिलाई जाएगी।

एमएमडीपी क्लिनिक से मरीजों को मिल रही सहूलियत

जिले को फाइलेरिया मुक्त बनाने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग लगातार प्रयास कर रही है। इसी के तहत जिले भर में फाइलेरिया क्लिनिक (एमएमडीपी) की शुरुआत की जा रही है। जिले के लगभग सभी पीएचसी व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में एमएमडीपी क्लिनिक की स्थापना की जा चुकी है। डॉ. यादव ने बताया कि इस क्लिनिक को खोलने का मकसद है कि फाइलेरिया जैसी बीमारी को रोका जा सके। फाइलेरिया पीड़ित मरीजों को बेहतर सुविधा मुहैया कराई जा सके। एमएमडीपी क्लिनिक में जाकर इसकी देखभाल और उपचार की जानकारी लेकर इसे आगे बढ़ने से रोक सकते हैं। इस क्लिनिक के माध्यम से फाइलेरिया रोगियों के जीवन को बेहतर करने की कोशिश की जा रही है।

फाइलेरिया दीर्घकालिक विकलांगता का प्रमुख कारण

डॉ. यादव ने बताया कि फाइलेरिया या हाथीपांव रोग सार्वजनिक स्वास्थ्य की गंभीर समस्या है। यह रोग मच्छर के काटने से फैलता है। यह मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से फैलता है। यह मच्छर गंदे एवं रुके हुए पानी में पनपता है। इस मच्छर के काटने से किसी भी उम्र का व्यक्ति ग्रसित हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, फाइलेरिया दुनिया भर में दीर्घकालिक विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक है। लोगों की जिम्मेदारी है कि जब स्वास्थ्य कर्मी घर पहुंचे तो फाइलेरिया से मुक्ति के लिए दवा का सेवन करें। इन दवाओं के खाने से किसी भी प्रकार के कोई दुष्प्रभाव नहीं होते हैं।

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