सीतामढ़ी- यक्ष्मा केंद्र के 31 कर्मियों के मजबूत इरादों से जिला बनेगा टीबी मुक्त ।

– जिला यक्ष्मा पदाधिकारी से लेकर लैब टेक्नीशियन और पिऊन तक टीबी उन्मूलन अभियान को सफल बनाने में लगे हैं

सीतामढ़ी। 23 अगस्त। मेहनत, लगन और कर्म पथ पर चल कर ही सफलता को हासिल किया जा सकता है। सेवा भावना से किए गए कार्य का फल अवश्य मिलता है। कुछ इसी सोच के साथ टीबी उन्मूलन अभियान को सफल बनाने में जिला यक्ष्मा केंद्र के 31 स्वास्थ्य कर्मी हर-संभव प्रयास में जुटे हैं। जिला यक्ष्मा पदाधिकारी से लेकर लैब टेक्नीशियन और पिऊन तक अपनी महती भूमिका निभा रहे हैं। जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि एकजुट प्रयास से किसी भी मुकाम को पाया जा सकता है। इसी जोश और जज्बे के साथ स्वास्थ्य कर्मी जिले को टीबी मुक्त बनाने के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि डीपीसी, डीपीएस, डीईओ, एसटीएस, एसटीएलएस, एलटी, एक्सरे टेक्नीशियन, क्लर्क से लेकर पिऊन तक सभी अपनी-अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं। इस वजह से टीबी मरीजों की पहचान, जांच, उपचार, काउंसलिंग आदि में तेजी आई है।

टीबी उन्मूलन के लक्ष्य के साथ सभी दे रहे योगदान-

टीबी मुक्त जिला बनाने के लक्ष्य के साथ यक्ष्मा केंद्र के कर्मी लगातार प्रयास कर रहे हैं। विभिन्न स्तरों पर काम कर रहे हैं। टीबी उन्मूलन के लक्ष्य के साथ कर्मी दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों तक  दौरा कर रहे हैं। टीबी मरीजों से मिल रहे हैं। उन्हें समझा रहे हैं, ताकि उनका हौसला बढ़ा रहे। इसका नेतृत्व खुद डॉ. कुमार कर रहे हैं। इसके अलावा साप्ताहिक और मासिक बैठक का आयोजन किया जाता है। जिससे काम के प्रति स्वास्थ्यकर्मियों का हौसला बना रहे। इसके साथ ही अभियान को मजबूती देने के लिए जागरूकता संबंधी गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है। डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि टीबी एक संक्रामक बीमारी है। इसे जड़ से मिटाने के लिए हम सभी को इसके खिलाफ लड़ाई लड़ने की जरूरत है। टीबी को मात देना मुश्किल नहीं है।

टीबी उन्मूलन के लिए आम लोग भी करें सहयोग-

डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि जिले में टीबी की विश्वसनीय जांच व सम्पूर्ण इलाज की सुविधा उपलब्ध है। इसलिए जैसे ही आपको टीबी के लक्षण दिखे, न घबराएं व लजाएं। सीधे निकटतम स्वास्थ्य केन्द्र पर जाएं और डॉक्टर से सलाह व मुफ्त में दवा लेकर इसका सेवन शुरू कर दें। अधिक से अधिक लोग टीबी के लक्षणों के बारे में जानें और अपने आसपास रहने वाले लोगों में यदि इनमें में से कोई लक्षण दिखे तो जांच के लिए प्रेरित करें। इससे हमें अपने लक्ष्य को पूरा करने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि जिले में अभी 2508 टीबी मरीजों का इलाज चल रहा है।

टीबी के लक्षण:

-दो हफ़्ते या अधिक समय तक खांसी आना; पहले सूखी खांसी तथा बाद में बलगम के साथ खून का आना
-रात में पसीना आना, चाहे मौसम ठंड का क्यों न हो
-लगातार बुखार रहना
-थकावट होना और सांस लेने में परेशानी होना
-वजन घटना

बचाव के उपाय:

-जांच के बाद टीबी रोग की पुष्टि होने पर दवा का पूरा कोर्स लें।
-मास्क पहनें तथा खांसने या छींकने पर मुंह को पेपर नैपकीन से कवर करें।
-मरीज किसी एक प्लास्टिक बैग में थूकें।
-मरीज हवादार और अच्छी रौशनी वाले कमरे में रहें। एसी से परहेज करें।
-पौष्टिक खाना खाएं। योगाभ्यास करें।
-बीड़ी, सिगरेट, हुक्का, तम्बाकू, शराब आदि से परहेज करें।
-भीड़भाड़ वाली गंदी जगहों पर जानें से बचें।

सरकार की ओर से पहल और सहायता:

-सरकारी अस्पतालों में निःशुल्क जांच और इलाज
-छह माह की दवा बिल्कुल मुफ्त
-जांच में रोग की पुष्टि होते ही मरीज को पौष्टिक भोजन के लिए निक्षय योजना के तहत छह माह तक 500 रूपये प्रतिमाह दिए जाते हैं

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