अररिया – जेल में बंद अभियुक्त गब्बू यादव को उम्र कैद, उम्रकैद

– जमीनी विवाद व रास्ते के विवाद को लेकर अभियुक्त गब्बू यादव ने गोली मारकर हत्या कर दी थी जयप्रकाश यादव का

नज़रिया न्यूज़ (अररिया)। रानीगंज के बहुचर्चित नगराही गोलीकांड मामले में जयप्रकाश यादव को मौत के घाट उतार देने वाले मुख्य आरोपी गब्बू यादव को जहाँ जिला एवं सत्र न्यायाधीश पीयूष कमल दीक्षित ने दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई है।

वही न्यायलय मे अनुपस्थित अभियुक्त राहुल यादव व मनोज यादव को फरार घोषित कर दिया गया है।

बताया जाता है कि गोलीकांड के मुख्य अभियुक्त रानीगंज के नगराही का रहनेवाला 25 वर्षीय गब्बू यादव पिता नित्यानंद यादव हैं।

इसपर आजीवन कारावास की सज़ा के अलावा भादवि की धारा 302, 34 व 27 आर्म्स एक्ट तहत यानी दो विभिन्न धाराओं में 20 हज़ार रुपये जुर्माना लगाया है।

जानकारी देते हुए लोक अभियोजक (पीपी) लक्ष्मी नारायण यादव ने बताया कि यह सजा पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पीयूष कमल दीक्षित ने एसटी 55/2022 मे सुनाये हैं।

विशेष रूप से घटना की जानकारी देते हुए लोक अभियोजक (पीपी) लक्ष्मी नारायण यादव ने पत्रकारों को बताया कि जिले के रानीगंज प्रखंड अंतर्गत नगराही ग्राम में स्थित जलधात्री माता मंदिर के समीप पूर्व से घात लगाए अभियुक्त गब्बू यादव अपने अन्य सहयोगियों के साथ पूर्व ज़मीनी विवाद व रास्ते के विवाद को लेकर जयप्रकाश यादव को घेर लिया तथा गब्बू यादव ने उसपर गोली चला दी। इलाज के क्रम में उसकी मृत्यु हो गई।

घटना को लेकर मृतक जयप्रकाश यादव के भाई ललन यादव पिता केवल प्रसाद यादव ने गब्बू यादव सहित अन्य अभियुक्तों के विरुद्ध रानीगंज थाना में आवेदन दिया, जहाँ रानीगंज थाना कांड संख्या 410/19 दाखिल हुआ।

प्रत्यदर्शियों ने कोर्ट में सरकारी गवाह बनकर घटना का पूर्ण समर्थन किया, गवाहो के बयान से संतुष्ट होकर न्यायलय के न्यायधीश श्री दीक्षित ने आरोपी गब्बू यादव के विरुद्ध भादवि की धार 302 व 27 आर्म्स एक्ट मे दोषी पाया।

वही कोर्ट में अनुपस्थित अभियुक्त क्रमशः राहुल यादव व मनोज यादव को फरारी घोषित किया गया।

सज़ा के बिंदु पर सरकार की ओर से लोक अभियोजक (पीपी) लक्ष्मी नारायण यादव ने सज़ाए मौत देने की अपील की।

जबकि बचाव पक्ष के वरीय अधिवक्ता अशोक कुमार वर्मा ने कम से कम सज़ा देने की गुहार लगाई।

दोनो पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायलय के न्यायधीश श्री दीक्षित ने सज़ा मुक़र्रर की।

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