अररिया- रूबेला उन्मूलन के प्रयासों में ग्रामीण चिकित्सकों को भूमिका महत्वपूर्ण।

  • पोलियो का खतरा अब भी बरकरार लक्षण वाले मरीजों की सतत निगरानी जरूरी।
  • वर्ष 2023 तक देश को खसरा व रूबैला से पूर्णत: मुक्त कराने का है लक्ष्य।

अररिया, 22 अगस्त । गंभीर रोगों की रोकथाम व उन्मूलन के प्रयासों में ग्रामीण चिकित्सकों की भूमिका निर्णायक साबित हो रही है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा उनके क्षमता संवर्धन व उन्हें प्रेरित व प्रोत्साहित करने को लेकर किया जा रहा निरंतर प्रयास भी इस दिशा में बेहद कारगर साबित हो रहा है। यही कारण है की कालाजार, फाइलेरिया, टीबी के साथ अब पोलियो पर प्रभावी नियंत्रण ही नहीं खसरा व रूबेला जैसे जानलेवा बीमारियों के उन्मूलन के प्रयासों में ग्रामीण चिकित्सकों की सक्रिय भागीदारी का विभागीय प्रयास भी तेज हो चुका है। ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य संबंधी किसी तरह की परेशानी होने पर लोग सबसे पहले इन्हीं चिकित्सकों के पास जाते हैं। इन रोग से जुड़े लक्षण वाले मरीज इलाज के लिये आने पर इससे जुड़ी जानकारी विभाग को देना जरूरी है। साथ ही ग्रामीण इलाकों में भ्रमण के दौरान चिकित्सक टीका की उपलब्धता, केंद्र तक लेकर लोगों की पहुंच से जुड़ी समस्या संबंधित प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, डीआईओ या फिर डब्ल्यूएचओ को करने पर इस दिशा में समुचित कार्रवाई संभव है। इसे लेकर डब्ल्यूएचओ द्वारा ग्रामीण चिकित्सकों को खास तौर पर प्रशिक्षित किया जा रहा है। साथ ही स्वस्थ समाज के निर्माण में उनसे अपेक्षित सहयोग की अपील की जा रही है।

पोलियो का कोई मामला नहीं, खतरा बरकरार

 

जानकारी देते हुए डब्ल्यूएचओ के एसएमओ डॉ शुभान अली कहते हैं की जिले में बीते कुछ सालों से पोलियो को कोई मामला सामने नहीं आया है। लेकिन पोलियो संक्रमण का खतरा अभी भी बरकरार है। लेकिन हाल ही में पड़ोसी देश पाकिस्तान व अफगानिस्तान में पोलियो के मामले सामने आये हैं। इसके अलावा अफ्रीका के मोजांबिक भी अब तक पोलियो से प्रभावित है। लिहाजा पोलियो के मामलों को लेकर सतर्कता जरूरी है। वहीं वर्ष 2023 तक देश को खसरा व रूबैला रोग से पूर्णत: मुक्त कराने का लक्ष्य निर्धारित है। पोलियो ही नहीं खसरा व रूबैला जैसे रोगों पर प्रभावी नियंत्रण के लिये डब्ल्यूएचओ के सहयोग से जिले में विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है। ताकि निर्धारित अवधी में रोग उन्मूलन के प्रयासों को निर्णायक मुकाम दिया जा सके।

 

रिपोर्टिंग की प्रक्रिया को दुरुस्त करना जरूरी

एसएमओ डॉ शुभान अली ने बताया कि पोलियो लिया ही नहीं खसरा व रूबेला जैसे रोगों पर पूर्ण नियंत्रण के लिये नियमित रिपोर्टिंग की प्रक्रिया को दुरुस्त करना जरूरी है।इससे जु़डे लक्षण वाले मरीजों की तत्काल चिन्हित करते हुए समुचित जांच व प्राप्त रिपोर्ट के आधार उचित चिकित्सकीय कदम उठाना महत्वपूर्ण है। जिले में पोलियो का अंतिम मामला 22 जनवरी 2009 में जोकीहाट के मटियारी दक्षिण टोला वार्ड संख्या 05 में मिला था। तब से अब तक पोलियो को कोई मामला नहीं मिला है। लेकिन पोलियो से जुड़े लक्षण वाले दर्जनों मरीज हर साल मिलते हैं। इसी तरह जिले में खसरा व रूबेला से होने वाली मौत के मामलों में कमी आयी है। इसमें पूरे देश में वर्ष 2019 में संचालित विशेष टीकाकरण अभियान का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इसलिये संबंधित मामलों की रिपोर्टिंग जरूरी है। ताकि इसकी समुचित जांच किया जा सके।

 

ग्रामीण चिकित्सकों की भूमिका महत्वपूर्ण

 

रोग नियंत्रण व उन्मूलन को लेकर किये जा रहे प्रयासों की जानकारी देते हुए सिविल सेर्जन डॉ विधानचंद्र सिंह बतातें हैं की खसरा व रूबेला पर प्रभावी नियंत्रण के लिये नौ माह व डेढ़ साल की उम्र में बच्चों को टीका लगाया जाता है। प्रभावी तौर पर रोग उन्मूलन के लिए 95 प्रतिशत बच्चों को टीकाकरण जरूरी है। निर्धारित मात्रा में सत्र का आयोजन, वैक्सीन की उपलब्धता, सभी बच्चों का ड्यू लिस्ट बने फिर सर्वे के आधार पर उनका टीकाकरण हो सके. इसके लिए लगातार जरूरी प्रयास हो रहे हैं। इन प्रयासों की सफलता में ग्रामीण चिकित्सकों को जरूरी प्रशिक्षण देते हुए उनका सहयोग व समर्थन जुटाने की कारगर प्रयास किया जा रहा है।

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